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बूढ़े पंपों के भरोसे अल्मोड़ा की पेयजल आपूर्ति
Updated Mon, 05 Jun 2017 11:24 PM IST
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बूढ़े पंपों के भरोसे अल्मोड़ा की पेयजल आपूर्ति
अल्मोड़ा। शहर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति कोसी नदी में तीन दशक से अधिक समय पहले स्थापित पेयजल पंपों के भरोसे है। यह पेयजल पंप अब बूढ़े हो चुके हैं। कोसी में बैराज बनने के बाद भी नगरवासियों को पानी की आपूर्ति करने में पुराने हो चुके पंप असफल साबित हो रहे हैं। हालांकि सरकार ने कोसी में इंटकवैल लगाने और कोसी से मटेला तक पेयजल लाइन बिछाने के लिए 10.86 करोड़ की योजना मंजूर कर 50 लाख अवमुक्त कर दिए हैं, लेकिन फिलहाल जल्द शहरवासियों को पेयजल संकट से निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। नगर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी जल संस्थान के अल्मोड़ा डिवीजन के पर है।
कोसी में लगे तीन पंपों से नगर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 1.30 लाख आबादी को पानी पहुंचाया जाता है। कोसी में पंप करीब तीन दशक पहले लगाए गए थे। पुराने हो चुके यह पंप अब क्षमता के अनुरूप पानी की आपूर्ति करने में असफल हैं। शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन 13 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, परंतु आठ से नौ एमएलडी ही पानी की आपूर्ति हो रही है। गरमी के सीजन में इन दिनों पेयजल का संकट गहरा गया है। ऐसी स्थिति में कोसी बैराज का भी लाभ लोगों को नहीं मिल प रहा है। पंप पुराने होने से कई बार इनमें खराबी आ जाती है। वहीं बारिश होने पर पंपों के नदी में डूब जाने से दो से तीन दिन तक पानी की आपूर्ति चरमरा जाती है। जिससे लोगों को भारी पेयजल संकट से जूझना पड़ता है।
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अल्मोड़ा। शहर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति कोसी नदी में तीन दशक से अधिक समय पहले स्थापित पेयजल पंपों के भरोसे है। यह पेयजल पंप अब बूढ़े हो चुके हैं। कोसी में बैराज बनने के बाद भी नगरवासियों को पानी की आपूर्ति करने में पुराने हो चुके पंप असफल साबित हो रहे हैं। हालांकि सरकार ने कोसी में इंटकवैल लगाने और कोसी से मटेला तक पेयजल लाइन बिछाने के लिए 10.86 करोड़ की योजना मंजूर कर 50 लाख अवमुक्त कर दिए हैं, लेकिन फिलहाल जल्द शहरवासियों को पेयजल संकट से निजात मिलने की उम्मीद नहीं है। नगर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी जल संस्थान के अल्मोड़ा डिवीजन के पर है।
कोसी में लगे तीन पंपों से नगर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 1.30 लाख आबादी को पानी पहुंचाया जाता है। कोसी में पंप करीब तीन दशक पहले लगाए गए थे। पुराने हो चुके यह पंप अब क्षमता के अनुरूप पानी की आपूर्ति करने में असफल हैं। शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन 13 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, परंतु आठ से नौ एमएलडी ही पानी की आपूर्ति हो रही है। गरमी के सीजन में इन दिनों पेयजल का संकट गहरा गया है। ऐसी स्थिति में कोसी बैराज का भी लाभ लोगों को नहीं मिल प रहा है। पंप पुराने होने से कई बार इनमें खराबी आ जाती है। वहीं बारिश होने पर पंपों के नदी में डूब जाने से दो से तीन दिन तक पानी की आपूर्ति चरमरा जाती है। जिससे लोगों को भारी पेयजल संकट से जूझना पड़ता है।
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