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ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनने से अल्मोड़ा नगर को खतरा

Mon, 05 Jun 2017 11:06 PM IST
Updated Mon, 05 Jun 2017 11:06 PM IST
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ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनने से अल्मोड़ा नगर को खतरा
ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनने से अल्मोड़ा नगर को खतरा
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा नगर और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दशकों में भूस्खलन की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। अल्मोड़ा नगर अनियोजित ढंग से बसा है। दूसरी ओर नगर की आबादी तेजी से बढ़ रही है और लगातार भवनों का निर्माण हो रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मुख्य नगर में बरसात के पानी की निकासी के उचित प्रबंध नहीं होने के कारण नगर के निचले इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं होती हैं और अब भी नगर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

अल्मोड़ा नगर अव्यवस्थित तरीके से बसा है। खास तौर पर बरसात के पानी की निकासी के लिए नगर में खास व्यवस्था नहीं है। कुछ सीमित नाले बने भी हैं तो वह कारगर नहीं हैं। नगर क्षेत्र में ठोस व्यवस्था नहीं होने से यहां बार-बार भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं। 1993 में इंदिरा कालोनी इलाके में अनेक मकान ध्वस्त हो गए थे। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इस समूचे इलाके में भवन बनाने पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था, लेकिन बाद के वर्षों में वहां दर्जनों भवन बना दिए गए। इसका नतीजा यह हुआ कि सितंबर 2010 फिर से भारी तबाही हुई और करीब 100 से अधिक मकान ध्वस्त हो गए थे। जिले में कुल 36 लोगों की जान चली गई। जिसमें 28 तो अल्मोड़ा तहसील के ही थे। इसके बावजूद नगरपालिका प्रशासन अथवा जिला स्तर पर किसी एजेंसी ने नियोजित निर्माण के लिए न तो कोई योजना बनाई गई और न ही इस पर नियंत्रण के लिए किसी विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। अब भी जिसकी जहां मर्जी वहां भवनों का निर्माण शुरू हो जाता है। जानकारों का मानना है कि इन घटनाओं के लिए प्राकृतिक और मानवजनित दोनों कारण जिम्मेदार हैं।
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