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इस बार गर्मियों में पानी का गंभीर संकट झेलना पड़ सकता है लोगों को
Updated Thu, 18 Jan 2018 11:01 PM IST
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बर्फविहीन हिमालय गर्मियों में पानी के संकट का संकेत
अल्मोड़ा। इस बार जाड़े के सीजन में अभी तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने से बर्फ से लकदक रहने वाला हिमालय भी श्रीहीन हो गया है। बारिश न होने का असर सूखे के रूप में सामने है तो हिमालय की बर्फविहीन चोटियां आने वाले दिनों में पानी के संकट का संकेत दे रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय क्षेत्र में पूरे जाड़े के सीजन में बर्फबारी नहीं होने से गर्मियों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से जहां जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाएंगे वहीं हिमालय में बर्फ कम रहने से नदियों में भी पानी कम हो जाएगा।
जाड़े का सीजन खत्म होने की ओर है, लेकिन अभी तक पहाड़ में न तो अच्छी बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। बीते दिसंबर में उच्च हिमालय क्षेत्र में बर्फ की हल्की चादर बिछी थी जो बीते कुछ दिनों से पड़ रही धूप में साफ हो गई है। हाल ये है कि आमतौर पर मई-जून में बर्फ पिघलने पर ओम पर्वत में दिखाई देने वाली ओम की आकृति अभी से उभरने लगी है।
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के निदेशक किरीट कुमार का कहना है कि दिसंबर मासांत से लेकर जनवरी तक बर्फबारी होने पर हिमालय में अच्छी बर्फ जमा हो जाती है लेकिन फरवरी और मार्च में बर्फबारी होने पर हिमालय में बर्फ ज्यादा नहीं टिकती है और तामपान बढ़ने से जल्द पिघलने लगती है। उन्होंने कहा कि बारिश-बर्फबारी नहीं होने से जहां फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है वहीं इससे फलों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। सेब आदि कुछ फलों को ठंड की अधिक आवश्यकता होती है, अन्यथा उनमें अच्छा बौर नहीं आ पाएगा।
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जल स्रोत नहीं हो पाएंगे रिचार्ज, नदियों में कम होगा प्रवाह
वैज्ञानिकों के मुताबिक जाड़े में बारिश नहीं होने का व्यापक असर पड़ेगा। जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाएंगे और गर्मियों के मौसम में नदियों में भी पानी कम रहेगा क्योंकि हिमालय में जाड़े के सीजन में इकट्ठा होने वाली बर्फ ही गर्मियों में पिघलकर नदियों में पानी के रूप में आती है।
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अल्मोड़ा। इस बार जाड़े के सीजन में अभी तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने से बर्फ से लकदक रहने वाला हिमालय भी श्रीहीन हो गया है। बारिश न होने का असर सूखे के रूप में सामने है तो हिमालय की बर्फविहीन चोटियां आने वाले दिनों में पानी के संकट का संकेत दे रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय क्षेत्र में पूरे जाड़े के सीजन में बर्फबारी नहीं होने से गर्मियों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से जहां जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाएंगे वहीं हिमालय में बर्फ कम रहने से नदियों में भी पानी कम हो जाएगा।
जाड़े का सीजन खत्म होने की ओर है, लेकिन अभी तक पहाड़ में न तो अच्छी बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। बीते दिसंबर में उच्च हिमालय क्षेत्र में बर्फ की हल्की चादर बिछी थी जो बीते कुछ दिनों से पड़ रही धूप में साफ हो गई है। हाल ये है कि आमतौर पर मई-जून में बर्फ पिघलने पर ओम पर्वत में दिखाई देने वाली ओम की आकृति अभी से उभरने लगी है।
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जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के निदेशक किरीट कुमार का कहना है कि दिसंबर मासांत से लेकर जनवरी तक बर्फबारी होने पर हिमालय में अच्छी बर्फ जमा हो जाती है लेकिन फरवरी और मार्च में बर्फबारी होने पर हिमालय में बर्फ ज्यादा नहीं टिकती है और तामपान बढ़ने से जल्द पिघलने लगती है। उन्होंने कहा कि बारिश-बर्फबारी नहीं होने से जहां फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है वहीं इससे फलों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। सेब आदि कुछ फलों को ठंड की अधिक आवश्यकता होती है, अन्यथा उनमें अच्छा बौर नहीं आ पाएगा।
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जल स्रोत नहीं हो पाएंगे रिचार्ज, नदियों में कम होगा प्रवाह
वैज्ञानिकों के मुताबिक जाड़े में बारिश नहीं होने का व्यापक असर पड़ेगा। जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाएंगे और गर्मियों के मौसम में नदियों में भी पानी कम रहेगा क्योंकि हिमालय में जाड़े के सीजन में इकट्ठा होने वाली बर्फ ही गर्मियों में पिघलकर नदियों में पानी के रूप में आती है।