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महिलाओं को पिरुल की पतियों से जैविक ईधन बनाने के तरीके बताए
Updated Sat, 06 Oct 2018 10:52 PM IST
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अल्मोड़ा। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण और सतत विकास संस्थान कोसी कटारमल के ग्रामीण तकनीकी परिसर में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों ने महिला समूहों की महिलाओं को पिरूल की पत्तियों से जैविक ईंधन बनाने के तरीके बताए। पिरुरूल से कोयला बनाने का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया गया।
संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरसी सुंदरियाल ने बायो ब्रिकेट की उपयोगिता और इसे निर्मित करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में चीड़ के वनों की अधिकता के कारण पिरूल बहुतायत में पाया जाता है। यह अति ज्वलनशील होने के कारण गर्मी के मौसम में जल्दी आग पकड़ लेता है। आग से पर्यावरण दूषित होता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पिरूल से बायो बिक्रेट बनाने का प्रशिक्षण आवश्यक है।
अब बायो बिक्रेट अन्य जैविक पदार्थों भूसा, लकड़ी के चिप्स, चारकोल, खरपतवार से भी बनाया जा सकता है। इस मौके पर ग्रामीण तकनीकी परिसर के नोडल अधिकारी डॉ. हर्षित पंत ने संस्थान की योजनाओं की जानकारी दी। इस मौके पर हवालबाग प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य एसएन पाठक, केंद्र के प्रशिक्षक जोगेंद्र प्रसाद, आनंद बल्लभ भट्ट, आजीविका सहकारिता समूह के कैलाश भट्ट, विनोद, ग्रामीण तकनीकी परिसर के डा. देवेंद्र चौहान, डीएस बिष्ट, दीप्ति भोजक, मनीषा पिमोली, भावना, हिमांशु, मुकेश देवराडी आदि मौजूद थे।
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संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरसी सुंदरियाल ने बायो ब्रिकेट की उपयोगिता और इसे निर्मित करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में चीड़ के वनों की अधिकता के कारण पिरूल बहुतायत में पाया जाता है। यह अति ज्वलनशील होने के कारण गर्मी के मौसम में जल्दी आग पकड़ लेता है। आग से पर्यावरण दूषित होता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पिरूल से बायो बिक्रेट बनाने का प्रशिक्षण आवश्यक है।
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अब बायो बिक्रेट अन्य जैविक पदार्थों भूसा, लकड़ी के चिप्स, चारकोल, खरपतवार से भी बनाया जा सकता है। इस मौके पर ग्रामीण तकनीकी परिसर के नोडल अधिकारी डॉ. हर्षित पंत ने संस्थान की योजनाओं की जानकारी दी। इस मौके पर हवालबाग प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य एसएन पाठक, केंद्र के प्रशिक्षक जोगेंद्र प्रसाद, आनंद बल्लभ भट्ट, आजीविका सहकारिता समूह के कैलाश भट्ट, विनोद, ग्रामीण तकनीकी परिसर के डा. देवेंद्र चौहान, डीएस बिष्ट, दीप्ति भोजक, मनीषा पिमोली, भावना, हिमांशु, मुकेश देवराडी आदि मौजूद थे।
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