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पहाड़ों को बचाना है तो गैरसैंण में बनाएं राजधानी: बिष्ट
Updated Mon, 02 Oct 2017 11:11 PM IST
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी कार्यालय में हुई बैठक में वक्ताओं ने मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। दो अक्तूबर 1994 को मुजफ्फरनगर में उत्तराखंड की अस्मिता के खिलाफ खिलवाड़ करने वाले तात्कालिक राज्य के जिम्मेदार अधिकारियों को सजा दिलाने की बात कही। उन्होंने भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों द्वारा लोगों पर हुई बर्बरता को नजरंदाज करने का आरोप लगाया। कहा कि यदि पहाड़ों को बचाना है तो उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंण बनाई जानी चाहिए।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए उलोवा के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि 23 सालों में राज्य सरकार की उदासीनता के चलते उत्तराखंड के पर्वतीय जिले आबादी विहीन हो गए हैं।
पहाड़ में पलायन की समस्या दिनों दिन गहराती जा रही है। पंचेश्वर बांध बनने के बाद पलायन और अधिक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि पलायन आयोग जनता को मूर्ख बनाने के लिए बनाया गया है। आयोग के कर्ताधर्ता खुद पलायन कर देहरादून में रहते हैं।
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संचालन पूरन तिवारी ने किया। बैठक में जंगबहादुर थापा, हरीश मेहता, शमशेर जंग गुरुंग, दयाकृष्ण कांडपाल, रेवती बिष्ट, कमलेश थापा, जगत रौतेला, सुशीला धपोला आदि थे।
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बैठक की अध्यक्षता करते हुए उलोवा के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि 23 सालों में राज्य सरकार की उदासीनता के चलते उत्तराखंड के पर्वतीय जिले आबादी विहीन हो गए हैं।
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पहाड़ में पलायन की समस्या दिनों दिन गहराती जा रही है। पंचेश्वर बांध बनने के बाद पलायन और अधिक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि पलायन आयोग जनता को मूर्ख बनाने के लिए बनाया गया है। आयोग के कर्ताधर्ता खुद पलायन कर देहरादून में रहते हैं।
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संचालन पूरन तिवारी ने किया। बैठक में जंगबहादुर थापा, हरीश मेहता, शमशेर जंग गुरुंग, दयाकृष्ण कांडपाल, रेवती बिष्ट, कमलेश थापा, जगत रौतेला, सुशीला धपोला आदि थे।