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बर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाएं, जैविक खेती को दें बढ़ावा
Updated Wed, 14 Jun 2017 05:11 PM IST
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बर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाएं, जैविक खेती को बढ़ावा दें
अल्मोड़ा। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार काश्तकारों को प्रोत्साहित कर रही है। राज्य सेक्टर और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत उद्यान विभाग के माध्यम से बर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित करने के लिए काश्तकारों को 75 फीसदी अनुदान मिलेगा। 25 फीसदी धनराशि लाभार्थी को वहन करनी होगी। बर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर काश्तकार जहां जैविक खेती कर सकेंगे वहीं बर्मी कंपोस्ट का विपणन कर आय भी अर्जित होगी।
पिछले कुछ सालों में पहाड़ी क्षेत्रों में भी रासायनिक खादों का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए काश्तकार रासायनिक खादों का उपयोग करने लगे हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं माना जाता है। रसायनिक खाद के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने अलग-अलग योजनाएं संचालित की हैं। उत्तराखंड सरकार की राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना है। इसके लिए राज्य सेक्टर और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से उद्यान विभाग काश्तकारों को प्रोत्साहित कर रहा है।
राज्य सेक्टर की योजना के अंतर्गत काश्तकार को दस फुट लंबे, आठ फुट चौड़े और 2.5 फुट गहरे बर्मी कंपोस्ट पिट का निर्माण करना होगा। इस पिट की कुल लागत 33,330 रुपये है। जिसमें काश्तकार को 24,997 रुपये अनुदान मिलेगा, जबकि 8333 रुपये काश्तकार को वहन करने होंगे। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत 30 फुट लंबे, आठ फुट चौड़े और ढाई फुट गहरे कंपोस्ट यूनिट की लागत एक लाख रुपये है। जिसमें बागवानी मिशन 50 फीसदी और राज्य सरकार 25 फीसदी अनुदान देगी, जबकि काश्तकार को 25 हजार रुपये स्वयं वहन करने होंगे। बर्मी कंपोस्ट उत्पादन से जहां जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा, वहीं काश्तकार इसका विपणन कर आय भी अर्जित कर सकते हैं। जिला उद्यान कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यूनिट स्थापना को काश्तकारों से आवेदन मांगे गए हैं। राज्य सेक्टर के अंतर्गत सौ और बागवानी मिशन के अंतर्गत 16 काश्तकारों ने आवेदन किए हैं।
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अल्मोड़ा। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार काश्तकारों को प्रोत्साहित कर रही है। राज्य सेक्टर और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत उद्यान विभाग के माध्यम से बर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित करने के लिए काश्तकारों को 75 फीसदी अनुदान मिलेगा। 25 फीसदी धनराशि लाभार्थी को वहन करनी होगी। बर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर काश्तकार जहां जैविक खेती कर सकेंगे वहीं बर्मी कंपोस्ट का विपणन कर आय भी अर्जित होगी।
पिछले कुछ सालों में पहाड़ी क्षेत्रों में भी रासायनिक खादों का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए काश्तकार रासायनिक खादों का उपयोग करने लगे हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं माना जाता है। रसायनिक खाद के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने अलग-अलग योजनाएं संचालित की हैं। उत्तराखंड सरकार की राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना है। इसके लिए राज्य सेक्टर और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से उद्यान विभाग काश्तकारों को प्रोत्साहित कर रहा है।
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राज्य सेक्टर की योजना के अंतर्गत काश्तकार को दस फुट लंबे, आठ फुट चौड़े और 2.5 फुट गहरे बर्मी कंपोस्ट पिट का निर्माण करना होगा। इस पिट की कुल लागत 33,330 रुपये है। जिसमें काश्तकार को 24,997 रुपये अनुदान मिलेगा, जबकि 8333 रुपये काश्तकार को वहन करने होंगे। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत 30 फुट लंबे, आठ फुट चौड़े और ढाई फुट गहरे कंपोस्ट यूनिट की लागत एक लाख रुपये है। जिसमें बागवानी मिशन 50 फीसदी और राज्य सरकार 25 फीसदी अनुदान देगी, जबकि काश्तकार को 25 हजार रुपये स्वयं वहन करने होंगे। बर्मी कंपोस्ट उत्पादन से जहां जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा, वहीं काश्तकार इसका विपणन कर आय भी अर्जित कर सकते हैं। जिला उद्यान कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यूनिट स्थापना को काश्तकारों से आवेदन मांगे गए हैं। राज्य सेक्टर के अंतर्गत सौ और बागवानी मिशन के अंतर्गत 16 काश्तकारों ने आवेदन किए हैं।
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