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स्पर प्रजाति के सेब और आडू का बगीचा होगा विकसित
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अल्मोड़ा। उद्यान विभाग डोल में पांच एकड़ भूमि में स्पर प्रजाति के सेब और आडू का बगीचा विकसित करेगा। इस प्रजाति के पौधे दो से तीन साल में फल देने लगते हैं। साथ ही सेब और आडू की इन प्रजातियों की नर्सरी भी लगाई जाएगी।
उद्यान विभाग के पास लमगड़ा ब्लॉक के डोल में पांच एकड़ का बगीचा है। इस बगीचे में विभिन्न फलों की नर्सरी भी है। इसके अलावा खुमानी और प्लम का बगीचा है। अब उद्यान विभाग स्पर प्रजाति के सेब और आडू के पेड़ों का बगीचा विकसित करेगा। उद्यान विभाग ने बगीचे में सेब के 334 पौधे लगाए हैं। जिनमें स्कारलेट गाला, सुपर चीफ, रेड डोक, विलाक्स प्रजाति शामिल हैं।
वहीं आडू के रेड जून प्रजाति के 800 पौधे लगाए हैं।
जिला उद्यान अधिकारी त्रिलोकीनाथ पांडे ने बताया कि स्पर प्रजाति के पेड़ दो से तीन साल में फल देने लगते हैं। इन पेड़ों की ग्राफ्टिंग कर नर्सरी भी विकसित की जाएगी, ताकि उन्नत प्रजाति के सेब और आडू के पौध तैयार हो सकें और काश्तकारों को उपलब्ध कराए जा सकें।
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उन्होंने बताया कि इसके अलावा दूनागिरि गोला मूली का बीज 10 नाली में लगाया गया है। पिछले वर्ष मूली का 50 किलो बीज उत्पादन हुआ था। इस बार डेढ़ क्विंटल बीज उत्पादित होगा। साथ ही उद्यान में 400 वर्ग मीटर में पाली हाउस भी लगाया जा रहा है।
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उद्यान विभाग के पास लमगड़ा ब्लॉक के डोल में पांच एकड़ का बगीचा है। इस बगीचे में विभिन्न फलों की नर्सरी भी है। इसके अलावा खुमानी और प्लम का बगीचा है। अब उद्यान विभाग स्पर प्रजाति के सेब और आडू के पेड़ों का बगीचा विकसित करेगा। उद्यान विभाग ने बगीचे में सेब के 334 पौधे लगाए हैं। जिनमें स्कारलेट गाला, सुपर चीफ, रेड डोक, विलाक्स प्रजाति शामिल हैं।
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वहीं आडू के रेड जून प्रजाति के 800 पौधे लगाए हैं।
जिला उद्यान अधिकारी त्रिलोकीनाथ पांडे ने बताया कि स्पर प्रजाति के पेड़ दो से तीन साल में फल देने लगते हैं। इन पेड़ों की ग्राफ्टिंग कर नर्सरी भी विकसित की जाएगी, ताकि उन्नत प्रजाति के सेब और आडू के पौध तैयार हो सकें और काश्तकारों को उपलब्ध कराए जा सकें।
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उन्होंने बताया कि इसके अलावा दूनागिरि गोला मूली का बीज 10 नाली में लगाया गया है। पिछले वर्ष मूली का 50 किलो बीज उत्पादन हुआ था। इस बार डेढ़ क्विंटल बीज उत्पादित होगा। साथ ही उद्यान में 400 वर्ग मीटर में पाली हाउस भी लगाया जा रहा है।