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मछली मारने को किए ब्लास्ट से ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष मेहरा की मौत
Updated Thu, 30 Aug 2018 08:48 PM IST
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मछली मारने को किए ब्लॉस्ट से ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मेहरा की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
धौलछीना /अल्मोड़ा। भैंसियाछाना ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सर्वजीत सिंह मेहरा (50) का एक दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो गया। इधर आम चर्चा है कि सर्वजीत मेहरा गधेरे में मछली मारने के लिए किए गए और ब्लास्ट की चपेट में आ गए जिससे उनकी मौत हो गई। उनके निधन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों ने गहरा शोक जताया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भैंसियाछाना ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष सर्वजीत सिंह मेहरा कुछ साथियों के साथ दल बैंड के पास स्थित एक गधेरे में मछली मारने गए थे। बताया गया है कि शाम के वक्त करीब साढ़े तीन बजे वहां पर मछली मारने के लिए ब्लास्ट किया गया और ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष सर्वजीत सिंह मेहरा इसकी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ब्लास्ट के कारण उनके सिर फट गया और यही नहीं ब्लास्ट के कारण दोनों हाथ भी बुरी तरह से खराब हो गए थे। जानकारी के मुताबिक घटना के समय उनकी सांसें चल रही थी। श्री मेहरा के साथी उन्हें बेस अस्पताल लाए लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। उधर राजस्व पुलिस उप निरीक्षक पूनम राज के मुताबिक ब्लास्ट की घटना की जानकारी नहीं है। उडलगांव हाल बाड़ेछीना निवासी सर्वजीत सिंह मेहरा पूर्व वन निगम उपाध्यक्ष धर्म सिंह महरा के भतीजे हैं। उनके निधन पर त्रिलोचन उप्रेती, पूरन सिंह सुप्याल, नंदा वल्लभ पांडे, मानसिंह, जगदीश पांडे, राजन खनी, किशन रावत, जगदीश नेगी, चंदन मेहरा, मोहन बिष्ट, नारायण दत्त, महिपाल सिंह, रामपाल सिंह, पप्पू लाल, प्रताप जीना, प्रकाश वर्मा समेत क्षेत्रवासियों ने गहरा शोक जताया है।
इन्सेट-
गधेरों और नदियों में मछलियों का अवैध शिकार आम बात
अल्मोड़ा। नदियों और गधेरों में मछलियों के शिकार के लिए ग्रामीण शुरु से ही कई तरीके अपनाते हैं। ज्यादातर लोग ब्लीचिंग पाउडर डालकर मछलियों का शिकार करते हैं। अल्मोड़ा के निकट कोसी, स्वाल, रामगंगा, गगास, गोमती, सरयू आदि नदियों के अलावा छोटे गधेरों में भी लोग अवैध तरीके से मछलियों का शिकार करते रहते हैं। इसमें ब्लास्ट से मछली मारना काफी खतरनाक माना जाता है। बताया जाता है कि लोग मछली मारने के लिए नदी में कारतूस जलाकर नदी में डालते हैं। कारतूस से बाहर निकली बत्ती में आग लगाई जाती है और उसके बाद उसे पानी में डाल दिया जाता है। वाटर प्रूफ बत्ती में लगी आग से कारतूस पानी के भीतर पहुंचकर फटता है जिससे मछलियां मर जाती हैं। कई बार यह कारतूस बाहर ही फट जाने से दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
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दीप जोशी
फोटो- 30एएलएम18पी- सर्वजीत सिंह मेहरा। (फाइल फोटो)।
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अमर उजाला ब्यूरो
धौलछीना /अल्मोड़ा। भैंसियाछाना ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सर्वजीत सिंह मेहरा (50) का एक दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो गया। इधर आम चर्चा है कि सर्वजीत मेहरा गधेरे में मछली मारने के लिए किए गए और ब्लास्ट की चपेट में आ गए जिससे उनकी मौत हो गई। उनके निधन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों ने गहरा शोक जताया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भैंसियाछाना ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष सर्वजीत सिंह मेहरा कुछ साथियों के साथ दल बैंड के पास स्थित एक गधेरे में मछली मारने गए थे। बताया गया है कि शाम के वक्त करीब साढ़े तीन बजे वहां पर मछली मारने के लिए ब्लास्ट किया गया और ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष सर्वजीत सिंह मेहरा इसकी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ब्लास्ट के कारण उनके सिर फट गया और यही नहीं ब्लास्ट के कारण दोनों हाथ भी बुरी तरह से खराब हो गए थे। जानकारी के मुताबिक घटना के समय उनकी सांसें चल रही थी। श्री मेहरा के साथी उन्हें बेस अस्पताल लाए लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। उधर राजस्व पुलिस उप निरीक्षक पूनम राज के मुताबिक ब्लास्ट की घटना की जानकारी नहीं है। उडलगांव हाल बाड़ेछीना निवासी सर्वजीत सिंह मेहरा पूर्व वन निगम उपाध्यक्ष धर्म सिंह महरा के भतीजे हैं। उनके निधन पर त्रिलोचन उप्रेती, पूरन सिंह सुप्याल, नंदा वल्लभ पांडे, मानसिंह, जगदीश पांडे, राजन खनी, किशन रावत, जगदीश नेगी, चंदन मेहरा, मोहन बिष्ट, नारायण दत्त, महिपाल सिंह, रामपाल सिंह, पप्पू लाल, प्रताप जीना, प्रकाश वर्मा समेत क्षेत्रवासियों ने गहरा शोक जताया है।
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गधेरों और नदियों में मछलियों का अवैध शिकार आम बात
अल्मोड़ा। नदियों और गधेरों में मछलियों के शिकार के लिए ग्रामीण शुरु से ही कई तरीके अपनाते हैं। ज्यादातर लोग ब्लीचिंग पाउडर डालकर मछलियों का शिकार करते हैं। अल्मोड़ा के निकट कोसी, स्वाल, रामगंगा, गगास, गोमती, सरयू आदि नदियों के अलावा छोटे गधेरों में भी लोग अवैध तरीके से मछलियों का शिकार करते रहते हैं। इसमें ब्लास्ट से मछली मारना काफी खतरनाक माना जाता है। बताया जाता है कि लोग मछली मारने के लिए नदी में कारतूस जलाकर नदी में डालते हैं। कारतूस से बाहर निकली बत्ती में आग लगाई जाती है और उसके बाद उसे पानी में डाल दिया जाता है। वाटर प्रूफ बत्ती में लगी आग से कारतूस पानी के भीतर पहुंचकर फटता है जिससे मछलियां मर जाती हैं। कई बार यह कारतूस बाहर ही फट जाने से दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
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दीप जोशी
फोटो- 30एएलएम18पी- सर्वजीत सिंह मेहरा। (फाइल फोटो)।