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सरकारी पौध रोपण कार्यक्रम एक नाटक: डा. बिष्ट
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:04 PM IST
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अल्मोड़ा। उलोवा के केंद्रीय नेता और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने प्रदेश में हरियाली के नाम पर किए जा रहे सरकारी पौध रोपण कार्यक्रम को नाटक बताते हुए इसे बंद करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दशकों से करोड़ों रुपये का बजट पौधरोपण में खर्च किया गया है। अगर इसका आंकलन किया जाए तो शहर या गांव में खाली जमीन का मिलना संभव नहीं है लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है।
उन्होंने कहा कि जो पेड़ सालों से खड़े थे उनको भी सरकार की मिली भगत से काट दिया गया। जिसका ताजा नमूना हाल ही में कोसी नदी के उद्गम क्षेत्र में वन विभाग के वन संरक्षक के बंगले और वन विभाग के कार्यालय में देवदार और तून जैसे संरक्षित पेड़ों को काट दिया गया। एक पूर्व जिलाधिकारी ने तो जागेश्वर से देवदार के पेड़ काटकर अपने लखनऊ में बन रहे आवास में तक पहुंचाया।
उन्होंने यह भी कहा कि कोसी के उद्गम क्षेत्र के पेड़ों का ठेका उत्तराखंड के 19 विधायकों के हस्ताक्षर से स्टार पेपर मिल साहरनपुर को 45 पैसा प्रति क्विंटल के हिसाब से 20 साल के लिए दे दिया गया और ठेकेदार के लोगों ने जंगल में पूरा कब्जा कर जंगल को ही समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हीं वनाधिकारी की नियुक्ति होती है जिनका वनों से कोई लगाव नहीं होता है। वहीं ईमानदार अधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है।
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उन्होंने कहा कि जो पेड़ सालों से खड़े थे उनको भी सरकार की मिली भगत से काट दिया गया। जिसका ताजा नमूना हाल ही में कोसी नदी के उद्गम क्षेत्र में वन विभाग के वन संरक्षक के बंगले और वन विभाग के कार्यालय में देवदार और तून जैसे संरक्षित पेड़ों को काट दिया गया। एक पूर्व जिलाधिकारी ने तो जागेश्वर से देवदार के पेड़ काटकर अपने लखनऊ में बन रहे आवास में तक पहुंचाया।
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उन्होंने यह भी कहा कि कोसी के उद्गम क्षेत्र के पेड़ों का ठेका उत्तराखंड के 19 विधायकों के हस्ताक्षर से स्टार पेपर मिल साहरनपुर को 45 पैसा प्रति क्विंटल के हिसाब से 20 साल के लिए दे दिया गया और ठेकेदार के लोगों ने जंगल में पूरा कब्जा कर जंगल को ही समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हीं वनाधिकारी की नियुक्ति होती है जिनका वनों से कोई लगाव नहीं होता है। वहीं ईमानदार अधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है।
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