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केंद्रीय सचिव ने पिरुल से बने उत्पादों को सराहा
Updated Tue, 11 Sep 2018 11:13 PM IST
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अल्मोड़ा। केंद्रीय पर्यावरण सचिव एसके मिश्रा ने जीबी पंत पर्यावरण संस्थान कटारमल में चीड़ की पत्तियों (पिरुल) से गत्ता और कागज बनाने की यूनिट का निरीक्षण किया। उन्होंने उत्पादों को देखा और सराहना करते हुए कहा कि इन उत्पादकों का बड़े स्तर पर निर्माण करें ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसे पहुंचाया जा सके। इस कार्य में विभाग हरसंभव मदद करेगा।
मिश्रा ने पिरुल से तैयार फाइल कवर, फोल्डर, कैरीबैग आदि उत्पादों को देखा और इसके लिए संस्थान के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में हर वर्ष गर्मियों में आग लगने से वन संपदा को नुकसान पहुंचता है। साथ ही पर्यावरण को क्षति पहुंचती है। चीड़ की पत्तियों का सदुपयोग कर जहां जंगलों को बचाया जा सकेगा, वहीं पिरुल से उत्पाद तैयार करने पर स्थानीय निवासियों को रोजगार भी मिलेगा। चीड़ की पत्तियों से बायोब्रिकेट बनाने की भी उन्होंने सराहना की।
सचिव ने राष्ट्रीय हिमालयी अध्यन मिशन के अंतर्गत चलाई जा रही मध्य हिमालयी क्षत्रों में एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और सतत आजीविका सुधार के तहत तैयार की गई पुस्तिका चीड़ की पत्तियां: आजीविका का एक उत्तम साधन, अदरक की उन्नत खेती पर्यावरण एवं आजीविका संवर्धन का एक साधन का विमोचन भी किया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. रणवीर सिंह रावल, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के नोडल अधिकारी ई. किरीट कुमार, डॉ. आरसी सुंदरियाल, आरके सिंह, ग्रामीण तकनीकी परिसर के नोडल अधिकारी डा. हर्षित पंत, महिल हाट के प्रतिनिधि राजेंद्र कांडपाल आदि मौजूद थे।
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मिश्रा ने पिरुल से तैयार फाइल कवर, फोल्डर, कैरीबैग आदि उत्पादों को देखा और इसके लिए संस्थान के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में हर वर्ष गर्मियों में आग लगने से वन संपदा को नुकसान पहुंचता है। साथ ही पर्यावरण को क्षति पहुंचती है। चीड़ की पत्तियों का सदुपयोग कर जहां जंगलों को बचाया जा सकेगा, वहीं पिरुल से उत्पाद तैयार करने पर स्थानीय निवासियों को रोजगार भी मिलेगा। चीड़ की पत्तियों से बायोब्रिकेट बनाने की भी उन्होंने सराहना की।
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सचिव ने राष्ट्रीय हिमालयी अध्यन मिशन के अंतर्गत चलाई जा रही मध्य हिमालयी क्षत्रों में एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और सतत आजीविका सुधार के तहत तैयार की गई पुस्तिका चीड़ की पत्तियां: आजीविका का एक उत्तम साधन, अदरक की उन्नत खेती पर्यावरण एवं आजीविका संवर्धन का एक साधन का विमोचन भी किया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. रणवीर सिंह रावल, राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के नोडल अधिकारी ई. किरीट कुमार, डॉ. आरसी सुंदरियाल, आरके सिंह, ग्रामीण तकनीकी परिसर के नोडल अधिकारी डा. हर्षित पंत, महिल हाट के प्रतिनिधि राजेंद्र कांडपाल आदि मौजूद थे।
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