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मानवतावादी विचारों को प्रतिस्थापित करने के लिए हुई थी जनसंघ की स्थापना: डा. जोशी
Updated Sat, 04 Nov 2017 10:42 PM IST
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अल्मोड़ा। पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में उत्तरांचल उत्थान परिषद की ओर से एकात्म मानववाद और दैशिक शास्त्र विषय पर आयोजित गोष्ठी में पहले सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के बारे में विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि जनसंघ की स्थापना मानवतावादी विचारों को प्रतिस्थापित करने के लिए की गई थी।
उत्तराखंड सेवा निधि के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डा. जोशी ने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियों में देश में दो धाराएं स्पष्ट रूप से चल रही थीं। जिसमें एक समाजवादी और दूसरी साम्यवादी धारा थी। तब काफी विचार-विमर्श के बाद यह तय हुआ कि जनसंघ मानवतावादी विचारों को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगा। इस मौके पर डा.एमएम जोशी ने यह भी रहस्योद्घाटन किया कि दैशिक शास्त्र पर पुस्तक लिखने वाले अल्मोड़ा निवासी बद्री शाह ठुलघरिया के बेटे ने उस पुस्तक की एक प्रति उन्हें दी थी। जिसे उन्होंने (डा.एमएमजोशी) साठ के दशक में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी को दी थी।
दूसरे सत्र में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. एमपी जोशी ने स्व. बद्री शाह ठुलघरिया द्वारा दैशिक शास्त्र पर लिखी गई पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 18वीं शताब्दी में अल्मोड़ा में कई उच्च कोटि के संत आए थे और पुस्तक के लेखक स्व. बद्री शाह के परिवार के लोग भी उनसे संपर्क में रहा करते थे। डा. एमपी जोशी के मुताबिक स्व. ठुलघरिया द्वारा दैशिक शास्त्र में लिखी गई पुस्तक पर इस सबका प्रभाव भी रहा है। दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने की। दूसरे सत्र में जितेंद्र बजाज ने भी विचार रखे। इस मौके पर आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक अशोक बेरी, सह प्रांत प्रचारक देवेंद्र, सह सेवा प्रमुख सुरेश सुयाल, दीपक पांडे, प्रो.एचएस धामी, प्रो.ओपीएस नेगी, डा. नवीन भट्ट, डा. चंद्र प्रकाश फुलोरिया, भीम सिंह सुनरी, मोहन सिंह रावल, हेमंत जोशी, विभाग प्रचारक नारायण, खीमा नंद, प्रेम प्रकाश पांडे आदि मौजूद थे।
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उत्तराखंड सेवा निधि के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डा. जोशी ने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियों में देश में दो धाराएं स्पष्ट रूप से चल रही थीं। जिसमें एक समाजवादी और दूसरी साम्यवादी धारा थी। तब काफी विचार-विमर्श के बाद यह तय हुआ कि जनसंघ मानवतावादी विचारों को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगा। इस मौके पर डा.एमएम जोशी ने यह भी रहस्योद्घाटन किया कि दैशिक शास्त्र पर पुस्तक लिखने वाले अल्मोड़ा निवासी बद्री शाह ठुलघरिया के बेटे ने उस पुस्तक की एक प्रति उन्हें दी थी। जिसे उन्होंने (डा.एमएमजोशी) साठ के दशक में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी को दी थी।
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दूसरे सत्र में विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. एमपी जोशी ने स्व. बद्री शाह ठुलघरिया द्वारा दैशिक शास्त्र पर लिखी गई पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 18वीं शताब्दी में अल्मोड़ा में कई उच्च कोटि के संत आए थे और पुस्तक के लेखक स्व. बद्री शाह के परिवार के लोग भी उनसे संपर्क में रहा करते थे। डा. एमपी जोशी के मुताबिक स्व. ठुलघरिया द्वारा दैशिक शास्त्र में लिखी गई पुस्तक पर इस सबका प्रभाव भी रहा है। दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने की। दूसरे सत्र में जितेंद्र बजाज ने भी विचार रखे। इस मौके पर आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक अशोक बेरी, सह प्रांत प्रचारक देवेंद्र, सह सेवा प्रमुख सुरेश सुयाल, दीपक पांडे, प्रो.एचएस धामी, प्रो.ओपीएस नेगी, डा. नवीन भट्ट, डा. चंद्र प्रकाश फुलोरिया, भीम सिंह सुनरी, मोहन सिंह रावल, हेमंत जोशी, विभाग प्रचारक नारायण, खीमा नंद, प्रेम प्रकाश पांडे आदि मौजूद थे।
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