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आज-कल के चक्कर में 1.10 करोड़ मशीन हुई कबाड़

Tue, 02 Jan 2018 10:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Updated Tue, 02 Jan 2018 10:30 PM IST
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 विकास की तमाम योजनाओं के लिए सरकार और शासन के प्रतिनिधि बजट का रोना रोते रहते हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की लापरवाही से पैसे की बर्बादी किसी से छिपी नहीं है। अल्मोड़ा के बेस अस्पताल की बात की जाए तो यहां 11 साल पहले 1.10 करोड़ की लागत से खरीदी गई डायलिसिस मशीन बिना शुरू हुए ही कबाड़ हो गई है। आरटीआई के तहत जब इसके शुरू नहीं होने की वजह पूछी गई तो अधिकारी गोलमोल जवाब देते नजर आए। कभी आरओ सिस्टम तो कभी तकनीशियन की कमी का रोना रोया गया।

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लोगों की मांग पर 2006 में बेस अस्पताल में 1.10 करोड़ रुपये की लागत से डायलिसिस मशीन खरीदी गई। मशीन आने के बाद तत्कालीन फिजीशियन डॉ. एके जोशी और दो स्टाफ नर्सों को विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा गया, लेकिन इधर डायलिसिस के लिए जरूरी आरओ ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया। इसके चलते डॉक्टर और नर्सों के प्रशिक्षण से लौटने के बाद भी अस्पताल में डायलिसिस मशीन शुरू नहीं हो सकी। जब भी डायलिसिस मशीन शुरू करने की बात उठती तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी किसी न किसी खामी की बात कहकर मामले को आगे टरका देते।
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आज-कल करते- करते 11 साल बीत गए, लेकिन मशीन चालू नहीं हो सकी। जानकारों की माने तो मशीन का यह मॉडल अब पुराना हो चुका है जो आज के लिए उपयोगी नहीं है। ऐसे में 1.10 करोड़ की यह मशीन एक तरह से कबाड़ हो गई है। इस बारे में एनटीडी निवासी मो.अकबर खान ने जो आरटीआई लगाई है उसमें भी अधिकारी मशीन चालू नहीं होने के स्पष्ट कारण नहीं गिना पाए। मो.अकबर खान ने मशीन पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी डायलिसिस सुविधा शुरू नहीं कराने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करके के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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इधर बेस अस्पताल के प्रमुख चिकित्साधीक्षक डा. टीडी रखोलिया ने बताया है कि पिछले काफी समय से अस्पताल में फिजीशियन का पद खाली है। डायलिसिस मशीन चलाने के लिए फिजीशियन और नर्सों को विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इसके अलावा डायलेसिस तकनीशियन का पद भी नहीं है और आरओ ट्रीटमेंट प्लांट भी उपलब्ध नहीं है। डा. रखोलिया ने बताया कि बीते दिनों महानिदेशालय को पत्र लिखा गया है कि अल्मोड़ा में यह मशीन निष्प्रयोज्य पड़ी है इसलिए इसे जहां सब सुविधाएं उपलब्ध हों वहां भेजा जाए। 

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