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भगवान विष्णु का ठिकाना है 'आदिबदरी धाम'

Sun, 22 Sep 2013 12:32 PM IST
अमर उजाला, कर्णप्रयाग/आदिबदरी
अमर उजाला, कर्णप्रयाग/आदिबदरी Updated Sun, 22 Sep 2013 12:32 PM IST
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'Adibdri Dham' is a home to Lord Vishnu

जलप्रलय में भले की प्रदेश का तीर्थाटन और पर्यटन चौपट हो गया हो, लेकिन आदिबदरी धाम में श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर बना हुआ है।

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मंदिर समिति के अनुसार जून से अब तक यहां दो हजार से अधिक बाहरी राज्यों के श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंच चुके हैं।

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श्रद्धालुओं की पहुंच से दूर
जहां आपदा से बदरी-केदार श्रद्धालुओं की पहुंच से दूर हुए, वहीं कर्णप्रयाग-नैनीताल मार्ग पर आवाजाही बनी रहने से आदिबदरी धाम में रौनक बनी रही।

इलाहाबाद से आए श्रद्धालु परिजात ओझा कहते हैं कि भले ही उन्होंने यहां बदरी और केदार के दर्शन न किए हो, लेकिन आदिबदरी धाम में पूजा कर उनकी यात्रा सफल हो गई है।
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सोशल मीडिया से मिला लाभ
कोलकाता के सुमित बरमन, अहमदाबाद के संतोष अग्रवाल, नीरज गायकवाड़ का कहना है कि बदरी-केदार के दर्शनों के लिए आए थे, लेकिन मार्ग बंद होने से वहां तो नहीं पहुंच पाए।
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आदिबदरी के दर्शन कर यात्रा सफल हो गई है। मंदिर समिति के सचिव जोध सिंह नेगी कहते हैं कि आपदा के दौरान आदिबदरी धाम की स्थिति और सुरक्षित सड़क मार्ग की जानकारी सोशल मीडिया की ओर से प्रचारित की गई, जिसका लाभ श्रद्धालुओं को मिला। अब भी यहां यात्रियों का आवागमन जारी है।

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11 माह खुले रहते हैं मंदिर के कपाट
कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे पर गैरसैंण और कर्णप्रयाग का मध्य क्षेत्र आदिबदरी धाम में 14 मंदिरों का समूह है। माना जाता है कि यहां पर विष्णु भगवान अभय मुद्रा में विराजमान है।

मंदिर में लगे निर्देश पट जो कि ब्रह्म लिपि में लिखा गया है। बताया जाता है कि शकून नामक कारीगर ने मंदिर समूह का निर्माण नवीं शताब्दी में किया था। स्थानीय विजय चमोला, नरेंद्र चाकर के अनुसार यहां पर मंदिर के कपाट साल में केवल एक पौष माह में बंद रहते हैं।

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इनकी भी सुनिए
पंच बदरियों मे होने के बावजूद सरकारें इसे विकसित करने की योजना नहीं बना पाई है, लेकिन इस बार आई प्राकृतिक आपदा में यहां पहुंच रहे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इसे धार्मिक और तीर्थाटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावना बना दी है।
- भुवन बरमोला, अध्यक्ष मंदिर समिति आदिबदरी धाम।

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