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बोर्ड टांग आपदा पीड़ितों को भूलीं सरकारें

Fri, 28 Jun 2013 11:50 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Fri, 28 Jun 2013 11:50 AM IST
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government forgot disaster victims

आपदा में केवल अपने राज्यों के प्रभावितों की तलाश पर

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जोर देने वाली सरकारें वाकई प्रभावितों की मदद को कितनी गंभीर हैं, इसका नजारा जौलीग्रांट एयरपोर्ट के समीप चोर पुलिया में लगाए गए आपदा राहत शिविरों में साफ दिखता है।

उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज

सबसे पहले बात दिल्ली सरकार की। उसका बैनर ऐसे स्थान पर टंगा है, जहां किसी की नजर आसानी से नहीं जाती। इस पर सहायता के नंबर जरूर लिखे हैं, लेकिन ऐसा  किसी तरह का कोई स्टाल नहीं लगाया गया, जिस पर वाकई आपदा पीड़ितों को मदद मिलती। इसकी हेल्प लाइन के नंबर मिलते नहीं।

कोई नजर नहीं आता
कुछ ऐसा ही हाल पश्चिमी बंगाल का है। इसकी ओर से भी आपदा पीड़ितों की मदद के लिए बैनर टांगा गया है, लेकिन यहां भी इस बैनर के अलावा कोई नजर नहीं आता। झारखंड सरकार ने बोर्ड के साथ ही स्टाल लगाया है, लेकिन इस पर पुलिस कर्मियों के अलावा और कोई मुश्किल से ही नजर आया।

यूपी सरकार के स्टाल पर भीड़ दिखी, अलबत्ता यहां काम करने वाले नुमाइंदे ज्यादा थे, लेकिन इनका फायदा उठाने वाले कम। राजस्थान के स्टाल का भी यही हाल दिखा। अलबत्ता विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तिगत प्रयासों से लगाए गए शिविरों पर आपदा प्रभावितों का ज्यादा भरोसा दिख रहा है। यही वजह है कि इन पर भीड़ भी नजर आ रही है।

शोपीस बने सहायता शिविर
केदारनाथ घाटी में आए जल प्रलय के बाद प्रभावितों की सहायता के लिए दून रेलवे स्टेशन पर पश्चिम बंगाल और बिहार सरकार ने सहायता केंद्र खोले हैं। मगर सुबह से शाम तक यहां सिर्फ उनके कर्मचारी ही दिखाई देते हैं।

स्टेशन में घुसने से पहले ही पश्चिम बंगाल सरकार का सहायता केंद्र दिखाई देता है। यहां दो लोग प्रभावित लोगों की सहायता के लिए तैनात हैं। केंद्र में प्रभावित लोगों की मदद के लिए चाय-पानी की व्यवस्था है।

बृहस्पतिवार दोपहर तक सहायता केंद्र पर एक भी प्रभावित नहीं आया था। आपदा पीड़ितों का इंतजार करते कर्मचारी खुद ही चाय पीते नजर आए। शाम को एक बुजुर्ग चाय-बंद खाता जरूर दिखाई दिया।

काउंटर सूना था

रेलवे स्टेशन पूछताछ केंद्र के समीप बिहार सरकार का सहायता केंद्र है। यहां दो पुलिस कर्मियों को बिहार के प्रभावित लोगों की मदद के लिए तैनात किया गया है। दोपहर के समय काउंटर सूना था। इस बीच एक व्यक्ति ने गुमशुदा बच्चे का पोस्टर लगाने के लिए कर्मचारियों से पूछताछ जरूर की।

इसके अलावा स्टेशन पर गुजरात प्रदेश कांग्रेस संगठन का केवल बैनर लगा है। प्रभावितों की मदद के लिए विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कांग्रेस सेवादल ने भी सहायता केंद्र खोले हुए हैं।

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