{"_id":"0b677dca-5a2a-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"when-policeman-asked-about-his-caste-to-his-department","type":"story","status":"publish","title_hn":"जब दारोगा ने विभाग से पूछी अपनी जाति ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जब दारोगा ने विभाग से पूछी अपनी जाति
बागपत/ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jan 2013 12:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने में हो रही दिक्कतों से परेशान एक दारोगा ने सूचना के अधिकार के तहत अपने विभाग से अपनी जाति के बारे में जानकारी मांगी है। बागपत के छपरौली निवासी यह दारोगा वर्तमान में सहारनपुर में तैनात है। साथ ही उसने विभाग के अभिलेखों में दर्ज अपने बच्चों की संख्या के बारे में भी जानकारी मांगी है।
विज्ञापन
दारोगा कानपुर में परिवार के साथ रहता था। वह फिलहाल सहारनपुर की शहर कोतवाली में तैनात है। दारोगा ने सूचना के अधिकार के तहत विभाग से अपनी जाति के बारे में जानकारी मांगी तो हर कोई हैरान रह गया। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में इसका कारण उसने अपने बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनवाने में हो रही परेशानी बताया है। उसके पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे वह अपनी जाति साबित कर सके।
विज्ञापन
इतना ही होता तो मान भी लिया जाता, दारोगा ने आरटीआई के तहत विभाग के अभिलेखों में दर्ज परिजनों की संख्या एवं नाम भी मांगा है। उसने अपने परिजनों के नाम भी लिखकर दिए हैं तथा पूछा है कि संख्या इतनी ही है, कम है या इससे अधिक है।
विज्ञापन
दारोगा द्वारा पत्र में लिखे नंबर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें कानपुर में अपने बच्चों का जाति प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी हो रही है। कानपुर में उनकी जाति का कोई रिकार्ड नहीं है। पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि अधिकारी हो या कर्मचारी जहां पर उनकी तैनाती रहती है, वहां उनका पूरा लेखा-जोखा होता है। एएसपी डाक्टर धर्मवीर सिंह ने पत्र की जांच की और इसका जवाब तैयार करने के आदेश दिए हैं।