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नवरात्रि का दुसरा दिन: काशी विश्वनाथ धाम में हुई पूजा, मां विशालाक्षी को चढ़ाई गई शृंगार सामग्री
Mon, 12 Oct 2026 06:01 PM IST
किशन चौबे
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: किशन चौबे
Updated Mon, 12 Oct 2026 06:01 PM IST
सार
वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम में शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन सोमवार को मां विशालाक्षी के लिए शृंगार सामग्री अर्पित की गई। इससे पहले बाबा विश्वनाथ को सामग्री का अवलोकन कराया गया। इस अवसर पर शास्त्रियों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ किया और लोगों के सुख, शांति व समृद्धि की कामना की।
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मां विशालाक्षी को चढ़ाई गई शृंगार सामग्री
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से मां विशालाक्षी के लिए शृंगार सामग्री अर्पित की गई। इससे पहले बाबा श्री काशी विश्वनाथ को विधि-विधान से शृंगार सामग्री का अवलोकन कराया गया। इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में शास्त्रियों ने नवदुर्गा सप्तशती का पाठ किया और लोककल्याण, सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगल की कामना की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पाठ
श्री काशी विश्वनाथ धाम में धार्मिक अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। शास्त्रियों ने नवदुर्गा सप्तशती का विधिवत पाठ कर मां दुर्गा की आराधना की। इस दौरान समस्त श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
नवदुर्गा सप्तशती का पाठ शक्ति उपासना की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पाठ भक्ति, आत्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।
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वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पाठ
श्री काशी विश्वनाथ धाम में धार्मिक अनुष्ठान वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। शास्त्रियों ने नवदुर्गा सप्तशती का विधिवत पाठ कर मां दुर्गा की आराधना की। इस दौरान समस्त श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
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नवदुर्गा सप्तशती का पाठ शक्ति उपासना की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पाठ भक्ति, आत्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।
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काशी विश्वनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
शिव और शक्ति की उपासना से जुड़ी काशी की परंपरा
काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान भगवान शिव और मां आदिशक्ति की उपासना से जुड़ी हुई है। बाबा श्री काशी विश्वनाथ की नगरी में शैव और शाक्त परंपराओं का समन्वय सनातन संस्कृति की समृद्ध विरासत को दर्शाता है।
शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस पर्व को शक्ति की उपासना, साधना और आराधना के विशेष अवसर के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर जोर
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से नवरात्रि के अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा हैं। इस अवसर पर मां भगवती से श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल बनाए रखने की प्रार्थना की गई।
हर-हर महादेव!
काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान भगवान शिव और मां आदिशक्ति की उपासना से जुड़ी हुई है। बाबा श्री काशी विश्वनाथ की नगरी में शैव और शाक्त परंपराओं का समन्वय सनातन संस्कृति की समृद्ध विरासत को दर्शाता है।
शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस पर्व को शक्ति की उपासना, साधना और आराधना के विशेष अवसर के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर जोर
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से नवरात्रि के अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा हैं। इस अवसर पर मां भगवती से श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल बनाए रखने की प्रार्थना की गई।
हर-हर महादेव!