विश्व निवेशक सप्ताह 2026: निवेश में जल्दबाजी नहीं, समझदारी-धैर्य जरूरी, सेबी सदस्य वार्ष्णेय ने किया आगाह
बीएचयू में निवेशक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सेबी सदस्य ने फिनफ्लुएंसर्स, ऑप्शन ट्रेडिंग और फर्जीवाड़े से आगाह किया। कहा कि निवेश में जल्दबाजी नहीं, समझदारी-धैर्य जरूरी है।
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निवेश के जरिये संपत्ति बनाने के लिए धैर्य, अनुशासन और सही वित्तीय समझ जरूरी है। बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर निवेश की रणनीति बदलने या सोशल मीडिया पर मिलने वाली निवेश सलाह पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना चाहिए। यह बात सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित निवेशक जागरूकता कार्यक्रम ‘स्मार्ट निवेश- सुरक्षित भविष्य की ओर’ में कही।
बाजार गिरने पर एसआईपी बंद न करें
वार्ष्णेय ने कहा कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का हिस्सा है। ऐसे में बाजार गिरने पर घबराकर एसआईपी बंद करने के बजाय निवेश के मूल उद्देश्य और समयावधि को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया रखने और ‘टाइम वैल्यू’ को समझने की सलाह दी।
उन्होंने फिनफ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया की निवेश सलाह को लेकर भी सावधान किया। कम समय में पैसा दोगुना करने या निश्चित रूप से बहुत अधिक रिटर्न देने के दावों से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि छह महीने में पैसा दोगुना करने का कोई फॉर्मूला नहीं है। निवेशकों को भुगतान से पहले संबंधित जानकारी की जांच करने और SEBI Check पोर्टल के जरिये भुगतान से जुड़ी जानकारी सत्यापित करने की सलाह भी दी गई।
वार्ष्णेय ने खुदरा निवेशकों को ऑप्शन मार्केट में कारोबार से पहले उसके जोखिम और कार्यप्रणाली को अच्छी तरह समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह सामान्य दीर्घकालिक निवेश से अलग है और पर्याप्त जानकारी के बिना इसमें उतरना जोखिम भरा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जिन्हें शेयर बाजार की पर्याप्त समझ नहीं है, वे इंडेक्स फंड जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। निवेश के दौरान पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने और अपनी जोखिम क्षमता व वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप विकल्प चुनने पर भी उन्होंने जोर दिया। फिजिकल गोल्ड में निवेश करने वालों को कीमत के साथ सोने की शुद्धता और खरीद की विश्वसनीयता पर ध्यान देने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में ‘धन, आजादी और सुरक्षा- मिथकों के पार’ विषय पर पैनल चर्चा हुई, जिसमें सेबी के पूर्णकालिक सदस्य, एनएसडीएल के एमडी एवं सीईओ , बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने विचार रखे। अमर उजाला बोनस के संपादक अंशुमान तिवारी ने पैनल का संचालन किया।
विश्व निवेशक सप्ताह के तहत आईआईटी बीएचयू की साइंस एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए ‘संज्ञान-इन्वेस्टर रेजिलिएंस हैकथॉन’ भी आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने सुरक्षित निवेश से जुड़े तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए। शीर्ष तीन विजेताओं को पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया।
निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि 20 साल पहले डिमेट अकाउंट खोला लेकिन निवेश का काम बहुत धीमा रहा। 2008 की मंदी में सब पैसा डूब गया। फिर लगा कि मैं इस सेक्टर में पूरी तरह से फेल हूं। हालांकि इससे मुझे ऐसी जानकारियां मिलीं कि क्या नहीं करना चाहिए। मेसेज हर दिन मिलता है, पैसे भी देते हैं लेकिन उसका फायदा नहीं ले रहा। लंबी-चौड़ी बैलेंस शीट, शेयर बाजार के विकल्प, लंबी पीडीएफ फाइल और शर्ताें को एआई से आसान करके युवाओं तक पहुंचाए तो ही इसका लाभ मिलेगा। ये एआई टूल इसमें मदद कर देगा। निवेशक को फैसला अपने आप ही लेना है। कोई बड़ा रिस्क है जिसे कोई समझ नहीं पा रहा है। ये रिस्क इसीलिए आ रहा है क्योंकि लोगों के हाथ में पैसा है। ये नहीं होता तो रिस्क भी नहीं होता।
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि हमें क्यों निवेश करना चाहिए। जब तक स्टॉक मार्केट में निवेश नहीं करेंगे तब तक देश की अर्थव्यवस्था को वहां नहीं पहुंचा पाएंगे जहां तक सोच रहे हैं। कई लोग स्टॉक मार्केट को बहुत अच्छे से नहीं समझते तो उन्हें इस भावना से बचना है कि युवा जुआ खेल रहे हैं। लालच से ये कहना है कि हमें दो दिन, पांच दिन या एक महीने में करोड़पति-अरबपति बनना है, इस भावना से बच जाएंगे तो ही निवेश कर पाएंगे। बिना लालच के निवेश क्यों करें, इसका जवाब ये है कि देश का ओवरऑल विकास इसी से होगा। लालच से बचने के लिए निवेश से पहले काफी अध्ययन करना चाहिए। ये एक दिन में नहीं बढ़ सकता इसलिए हर दिन आधा घंटा पढ़ें और छोटे निवेश से शुरू करें। मेहनत किया तो उम्मीद होगी कि कुछ पैसा भी मिले। स्टॉक मार्केट में निवेश कर रहे हैं तो पैसा आना जरूरी है। ये लालच नहीं श्रम और ज्ञान का रिजल्ट है। समृद्धि और संतोष के बीच बैलेंस बनेगा। समृद्धि, आजादी और सुरक्षा के बीच सही क्रम को लेकर कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि उनको तीनों ही चीज चाहिए। इसमें कौन सी चीज किस वक्त ज्यादा जरूरी है। निर्णय लेने की आजादी होनी चाहिए। हमारे पास सभी सुख सुविधा के बाद जेल में बंद हैं तो समृद्धि बेकार है। जंगल में भूखे पेट दौड़ रहे तो ऐसी आजादी किस काम की और युद्ध के समय आपको आजादी मिले तो खतरनाक होगा।
जल्दी निवेश शुरू करने से कंपाउंडिंग का लाभ
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनएसडीएल के एमडी एवं सीईओ विजय चंडोक ने कहा कि निवेश का निर्णय लेने से पहले रिस्क, रिटर्न और लिक्विडिटी को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटी अवधि में वेल्थ क्रिएशन मुश्किल है और लंबी अवधि में अनुशासित निवेश से कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है। चंडोक ने निवेश जल्द शुरू करने की सलाह देते हुए कहा कि कम उम्र में शुरू किया गया नियमित निवेश कंपाउंडिंग को अधिक समय देता है। उन्होंने डीमैट फ्रॉड से बचने के लिए पासवर्ड, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करने की भी सलाह दी।
- कोई बड़ा रिस्क है, जिसे कोई समझ नहीं पा रहा है। ये रिस्क इसीलिए आ रहा है क्योंकि लोगों के हाथ में पैसा है। -प्रो. अमित पात्रा, डायरेक्टर-आईआईटी बीएचयू
- जब तक स्टॉक मार्केट में निवेश नहीं करेंगे, तब तक देश की अर्थव्यवस्था को वहां नहीं पहुंचा पाएंगे जहां तक सोच रहे हैं। -प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, कुलपति-बीएचयू