यह है हाल: बनारस रेलवे स्टेशन पर नहीं हो पा रही जलापूर्ति, प्लेटफार्म नंबर 1 पर यात्री-रेलकर्मी हो रहे परेशान
Varanasi News: संबंधित विभाग के अधिकारी सिर्फ आज और कल में पंप दुरूस्त कराने की बात कहते हुए सांत्वना दे रहे हैं। बनारस स्टेशन निदेशक लवलेश राय ने बताया कि वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण यह समस्या है। 24 घंटे के अंदर में संबंधित विभाग इस समस्या को दूर कर लेगा।
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बनारस स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर पानी का संकट गहरा गया है। किसी भी पेयजल बूथ में हफ्ते भर से पानी नहीं है। इससे यात्रियों के साथ ही रेल कर्मियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को स्टाल से बोतल बंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
प्लेटफार्म संख्या एक के साथ ही सीआरएस, आरपीएफ, सीएचआई, सिग्नल समेत अन्य विभागों में भी पानी की सप्लाई नहीं है। स्टेशन से बनकर चलने वाली ट्रेनों के रिफलिंग में भी समस्या का आ रही है। रेल कर्मियों के अनुसार हफ्ते भर से वाटर मोटर जल जाने के कारण यह समस्या बनी हुई है।
पेयजल बूथ में काई, टूटे हुए फर्श
स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो स्थित पेयजल बूथ में भारी गंदगी मिली। इसी पेजयल बूथ से यात्री भरने को विवश है। प्रयागराज के यात्री विजय सोनकर और दिल्ली जाने वाले यात्री अमन ने बताया कि साफ-सफाई नहीं होने से स्टाल से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ा। पेजयल बूथ के पानी का स्वाद भी खराब है। पेजयल बूथ में चारों तरफ काई लगी हुई है। वहीं, वाटर कूलर में भी सामान्य पानी आ रहा है। प्लेटफार्म संख्या दो पर ही पत्थर के बेंच भी जगह-जगह से टूटे हुए हैं।
35 तालाब खाली, नहरों में 25 से आएगा पानी
जिले में लगभग 35 तालाब हैं। ये आसपास की नहरों से जुड़े हैं। सिंचाई विभाग का दावा है कि सभी भर दिए गए हैं। जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। जिले में 6 ब्लाकों से 30 नहर, माइनर और रजवाहे गुजरे हैं। इनके किनारे के तालाबों में इन्हीं से पानी आता है। मगर, न नहर में पानी है और न तालाब में। जबकि पशु-पक्षियों के लिए तालाब ही सहारा होता है।
ज्ञानपुर नहर प्रखंड के उपखंड चतुर्थ में 15 और जौनपुर नहर प्रखंड के वाराणसी उपखंड से 17 तालाब जुड़े हैं। सहायक अभियंता प्रवीन कुमार ने बताया कि कुछ तालाबों को भरवा दिया गया है। जो नहरों से दूर हैं, वे नहीं भरे गए हैं।
सहायक अभियंता ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जिले की नहरों में 25 जून से पानी आने लगेगा। प्रयागराज की गंगा से ही नजरों में पानी यहां आता है। अगर गंगा का जलस्तर बढ़ा तो 10 पंप चलाए जाएंगे। अन्यथा कुछ ही चलेंगे। उधर, शारदा सहाय नदी से भी पानी छोड़ा गया है। उम्मीद है कि वहां से एक सप्ताह में पानी आ जाएगा।