UP News: पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हमले के मामले में कल आएगा फैसला, राहुल गांधी मामले में छह मई को सुनवाई
Varanasi News: पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हमले के मामले में सभी पक्षों की ओर से बहस दाखिल की गई। अब इस मामले में 15 अप्रैल को फैसला आ सकता है।
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विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में सोमवार को पूर्व सांसद धंनजय सिंह पर जानलेवा हमला के मामले में सभी पक्षों के ओर से विधि व्यवस्था और लिखित बहस दाखिल की गई। अब मामले में 15 अप्रैल को फैसला आ सकता है। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने रूलिंग के हिसाब से लिखित बहस दाखिल की है।
अभियोजन के मुताबिक, चार अक्तूबर 2002 को तत्कालीन विधायक और जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ चार पहिया वाहन से जौनपुर लौट रहे थे। इसी दौरान वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास बोलेरो से उतरे अभय सिंह (वर्तमान में सपा विधायक) और उनके 4-5 साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर, चालक समेत कई लोग घायल हो गए थे।
मामले में वादी धनंजय सिंह ने वर्तमान में अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना में नाम सामने आने पर पुलिस ने विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह को भी नामजद किया था। साथ ही अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। इस मामले सुनवाई अंतिम दौर में चल रही है।
राहुल गांधी मामले में निगरानी अर्जी पर हुई सुनवाई, छह मई की तिथि नियत
ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान श्रीराम पर टिप्पणी मामले में सोमवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की कोर्ट में निगरानी अर्जी पर सुनवाई हुई। इसमें छह मई की तिथि नियत की गई है। अवर कोर्ट से मूल पत्रावली तलब हो चुकी है। इसमें भी निगरानी कर्ता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पार्टी बनाया है। मगर विपक्षी की ओर से अभी उपस्थित नहीं हुए है।
प्रकरण के अनुसार अधिवक्ता हरीशंकर पांडेय ने कोर्ट में रिवीजन अर्जी दाखिल किया। कहा गया कि भारतीय संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका के बोस्टन में 21 अप्रैल को पहुंचे थे। यहां पर ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ उनका एक सेशन था। राहुल ने भगवान श्रीराम को लेकर विवादित बयान दिए थे। उन्होंने भगवान राम को ''पौराणिक'' बताया था और उस युग पर बताई जाने वाली कहानियों को काल्पनिक कहा था।
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भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। राम मंदिर का विरोध भी किया था और वह विदेश में जाकर भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं। इसके संबंध में उसने अवर न्यायालय में परिवाद पत्र दाखिल किया, जिस पर कोर्ट ने सरसरी तरीके से , विधि व्यवस्था के विरोध उसके परिवाद पत्र पोषणीयता के स्थिति पर खारिज कर दिया है। निगरानी कर्ता ने निगरानी अर्जी को स्वीकार करने की गुहार लगाई है।