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वेद विद्यालयों को मिली मान्यता, बटुक होंगे वेद भूषण और विभूषण
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शिक्षा मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड को नियमित स्कूल बोर्ड के रूप में मान्यता मिल गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्विटर के जरिये सूचना साझा की। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि मान्यता मिलने से श्री कांची कामकोटि पीठ, काशी और अन्य वेद विद्यालयों में अध्ययन करने वाले बच्चे आगे उच्च शिक्षा व रोजगार से जुड़ सकेंगे।
नियमित स्कूल बोर्ड के रूप में मान्यता मिलने के बाद बोर्ड द्वारा प्रदान किए गए प्रमाणपत्र उच्च शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश और केंद्र एवं राज्य सरकार के संगठनों में रोजगार के लिए भारत के अन्य केंद्रीय एवं राज्य स्कूल बोर्ड द्वारा जारी प्रमाणपत्र के समतुल्य होंगे।
महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद संस्कृ त शिक्षा बोर्ड के तहत प्रदान किए गए प्रमाण पत्र वेद भूषण दसवीं कक्षा के समकक्ष होंगे। जबकि वेद विभूषण प्रमाणपत्र 12वीं कक्षा के समकक्ष होगा। काशी मठ और मंदिरों का शहर है। ऐसे में तमाम मंदिरों व मठ में रहने वाले बटुकों को वेद की शिक्षा दी जाती है। वहीं, वाराणसी में 110 से अधिक संस्कृत स्कूल में छात्रों को वेद की शिक्षा प्रदान की जाती है। मठ, मंदिरों व वेद स्कूलों में पढ़ने वाले पांच हजार से ज्यादा बटुकों को लाभ मिल सकेगा। बटुक आने वाले समय में उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
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वेदपाठी कन्याओं को मिलेगा लाभ
संस्कृत शिक्षा बोर्ड को मान्यता मिलने के बाद काशी में स्थित पाणिनी कन्या महाविद्यालय में पढ़ने वाले वेदपाठी कन्याओं को भी इसका लाभ मिलेगा। वर्तमान में महाविद्यालय में 100 से अधिक कन्याएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। 50 छात्राएं ऐसी हैं जो वेदों का ज्ञान ले रही हैं। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नंदिता शास्त्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में वेद शिक्षा महत्वपूर्ण है। ऐसे में विभिन्न संस्थानों व वेद विद्या लेने वाले छात्रों को इसका लाभ मिल सकेगा।
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नियमित स्कूल बोर्ड के रूप में मान्यता मिलने के बाद बोर्ड द्वारा प्रदान किए गए प्रमाणपत्र उच्च शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश और केंद्र एवं राज्य सरकार के संगठनों में रोजगार के लिए भारत के अन्य केंद्रीय एवं राज्य स्कूल बोर्ड द्वारा जारी प्रमाणपत्र के समतुल्य होंगे।
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महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद संस्कृ त शिक्षा बोर्ड के तहत प्रदान किए गए प्रमाण पत्र वेद भूषण दसवीं कक्षा के समकक्ष होंगे। जबकि वेद विभूषण प्रमाणपत्र 12वीं कक्षा के समकक्ष होगा। काशी मठ और मंदिरों का शहर है। ऐसे में तमाम मंदिरों व मठ में रहने वाले बटुकों को वेद की शिक्षा दी जाती है। वहीं, वाराणसी में 110 से अधिक संस्कृत स्कूल में छात्रों को वेद की शिक्षा प्रदान की जाती है। मठ, मंदिरों व वेद स्कूलों में पढ़ने वाले पांच हजार से ज्यादा बटुकों को लाभ मिल सकेगा। बटुक आने वाले समय में उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
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वेदपाठी कन्याओं को मिलेगा लाभ
संस्कृत शिक्षा बोर्ड को मान्यता मिलने के बाद काशी में स्थित पाणिनी कन्या महाविद्यालय में पढ़ने वाले वेदपाठी कन्याओं को भी इसका लाभ मिलेगा। वर्तमान में महाविद्यालय में 100 से अधिक कन्याएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। 50 छात्राएं ऐसी हैं जो वेदों का ज्ञान ले रही हैं। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नंदिता शास्त्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में वेद शिक्षा महत्वपूर्ण है। ऐसे में विभिन्न संस्थानों व वेद विद्या लेने वाले छात्रों को इसका लाभ मिल सकेगा।