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काशी में बनेगा ‘लंदन स्ट्रीट’: पत्थरों की नक्काशीदार रेलिंग और खूबसूरत लाइटिंग से चमकेगा यह रूट
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 27 Sep 2017 03:42 PM IST
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लंदन स्ट्रीट
- फोटो : self
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विश्व की सबसे पुरातन नगरी में से एक वाराणसी को सजाने व सवारने का प्रयास किया जा रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में काशी में लंदन स्ट्रीट जैसा नजारा दिखेगा। तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुरूप योजना परवान चढ़ी तो आने वाले समय में गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग काशी के ‘लंदन स्ट्रीट’ के रूप में जाना जाएगा।
न अतिक्रमण न डिवाइडर। पत्थरों की नक्काशीदार रेलिंग, पोल और खूबसूरत लाइटिंग के बीच चमचमाती सड़क। साफ-सुथरे फुटपाथ के किनारे जगह-जगह टेलीफोन बूथ, बॉयो टॉयलेट और डस्टबिन के साथ शुद्ध पेयजल के लिए वाटर वेंडिंग मशीन।
ये सारी सुविधाएं नक्काशीदार पत्थरों और इमारती लकड़ियों से विकसित की जाएंगी। उनके एंटीक स्वरूप में काशी की समृद्ध प्राचीन विरासत की झलक नजर आएगी।
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पर्यटकों को यहां कुछ वैसे ही नजारे का अहसास होगा जैसा कि उन्हें ‘लंदन स्ट्रीट’ की बेहद खूबसूरत, खुली-खुली, चमकदार सड़कों पर होता है। पर्यटन सचिव रश्मि वर्मा के निर्देश पर इसका प्रस्ताव उत्तर प्रदेश पर्यटन की ओर से तैयार कराया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सभी पहलुओं का अध्ययन करते हुए दो से तीन महीने में प्रस्ताव तैयार कर लिए जाने की संभावना है। गंगा तट से लगा हिस्सा होने के नाते इसके विकास से पर्यटन में तेजी आएगी।
वाराणसी आने वाले सर्वाधिक सैलानी दशाश्वमेध से ही गंगा घाटों की सैर शुरू करते हैं। गंगा आरती देखने के लिए रोजाना यहां हजारों लोग पहुंचते हैं। इन सबको ध्यान में रखते हुए ही गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग को विकसित कर विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं मुहैया कराने की योजना बनाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन के संयुक्त निदेशक अविनाश चंद्र मिश्र ने बताया कि विभागीय उच्चाधिकारियों के निर्देशन में प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। गोदौलिया से दशाश्वमेध तक के रूट को विश्वस्तरीय पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा।
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न अतिक्रमण न डिवाइडर। पत्थरों की नक्काशीदार रेलिंग, पोल और खूबसूरत लाइटिंग के बीच चमचमाती सड़क। साफ-सुथरे फुटपाथ के किनारे जगह-जगह टेलीफोन बूथ, बॉयो टॉयलेट और डस्टबिन के साथ शुद्ध पेयजल के लिए वाटर वेंडिंग मशीन।
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ये सारी सुविधाएं नक्काशीदार पत्थरों और इमारती लकड़ियों से विकसित की जाएंगी। उनके एंटीक स्वरूप में काशी की समृद्ध प्राचीन विरासत की झलक नजर आएगी।
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पर्यटकों को यहां कुछ वैसे ही नजारे का अहसास होगा जैसा कि उन्हें ‘लंदन स्ट्रीट’ की बेहद खूबसूरत, खुली-खुली, चमकदार सड़कों पर होता है। पर्यटन सचिव रश्मि वर्मा के निर्देश पर इसका प्रस्ताव उत्तर प्रदेश पर्यटन की ओर से तैयार कराया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सभी पहलुओं का अध्ययन करते हुए दो से तीन महीने में प्रस्ताव तैयार कर लिए जाने की संभावना है। गंगा तट से लगा हिस्सा होने के नाते इसके विकास से पर्यटन में तेजी आएगी।
वाराणसी आने वाले सर्वाधिक सैलानी दशाश्वमेध से ही गंगा घाटों की सैर शुरू करते हैं। गंगा आरती देखने के लिए रोजाना यहां हजारों लोग पहुंचते हैं। इन सबको ध्यान में रखते हुए ही गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग को विकसित कर विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं मुहैया कराने की योजना बनाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन के संयुक्त निदेशक अविनाश चंद्र मिश्र ने बताया कि विभागीय उच्चाधिकारियों के निर्देशन में प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। गोदौलिया से दशाश्वमेध तक के रूट को विश्वस्तरीय पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा।
क्रूज संचालन का लिए 12 करोड़ रुपये मंजूर
क्रूज
- फोटो : SELF
पर्यटन विकास के लिए गंगा में क्रूज संचालन की योजना पर मुहर लगाते हुए केंद्र सरकार ने सवा 12 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। प्रसाद योजना के तहत इसे मूर्त रूप दिया जाएगा।
इस पूरी योजना का नाम ‘स्टोरी टेलिंग क्रूज’ है। एक क्रूज पर लगभग सवा 12 करोड़ रुपये खर्च आएगा। अस्सी से राजघाट तक यह क्रूज चलेगा। जिसकी क्षमता से 45 से 50 लोगों के बैठने की होगी।
इस क्रूज से घाटों पर रंग-बिरंगी लेजर लाइट डाली जाएगी और घाटों के इतिहास और खासियत की जानकारी हेडफोन के माध्यम से पर्यटक सुन सकेंगे। कई भाषाओं में यह जानकारी दी जाएगी।
इस पूरी योजना का नाम ‘स्टोरी टेलिंग क्रूज’ है। एक क्रूज पर लगभग सवा 12 करोड़ रुपये खर्च आएगा। अस्सी से राजघाट तक यह क्रूज चलेगा। जिसकी क्षमता से 45 से 50 लोगों के बैठने की होगी।
इस क्रूज से घाटों पर रंग-बिरंगी लेजर लाइट डाली जाएगी और घाटों के इतिहास और खासियत की जानकारी हेडफोन के माध्यम से पर्यटक सुन सकेंगे। कई भाषाओं में यह जानकारी दी जाएगी।