वाराणसी : डिजिटल क्लास रूम में सुनहरे भविष्य की पटकथा लिख रहे स्मार्ट बच्चे
भले ही कक्षाएं अब नियमित शुरू हो चुकी हैं, लेकिन छात्र इतने एक्सपर्ट हो चुके हैं कि किसी भी उलझन के सामने आने पर मोबाइल से हल निकाल लेते हैं।
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कोरोना काल ने शिक्षा का स्वरूप बदल दिया है। जिले के स्कूलों में अब डिजिटल क्लास रूम में पढ़ाई हो रही है। छात्रों ने भी पढ़ाई का नया तरीका सीख लिया है। कोरोना काल से पहले ऑनलाइन पढ़ाई के बारे में सोचकर अटपटा लगता था, लेकिन आज यह हर विद्यार्थी के शैक्षणिक गतिविधि का हिस्सा बन चुकी है।
आपदा ने विद्यार्थियों को ढेर सारे अवसर उपलब्ध कराए और शिक्षा जगत की व्यापकता को महसूस कराया। वहीं, स्कूलों ने भी छात्रों की पढ़ाई को नियमित रखने के लिए पूरी तरह से डिजिटल शिक्षा को अपनाया। एप और व्हाट्एसएप ग्रुप बनाकर पढ़ाई व रचनात्मक गतिविधियों को नियमित रखा।
भले ही कक्षाएं अब नियमित शुरू हो चुकी हैं, लेकिन छात्र इतने एक्सपर्ट हो चुके हैं कि किसी भी उलझन के सामने आने पर मोबाइल से हल निकाल लेते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ सबसे अधिक निजी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को मिला है।
हिंद कॉन्वेंट स्कूल की प्रधानाचार्य स्मिता शर्मा ने बताया कि कभी किसी ने सोचा भी नहीं था कि छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई होगी लेकिन कोरोना काल के दौरान बंद रहे स्कूलों के बीच इसकी शुरुआत हुई और अब स्थिति यह है कि कक्षा एक से लेकर आगे तक की कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई करना सीख गए हैं। शुरुआत में कुछ समस्याएं आईं, लेकिन फिर स्थितियां बदलती चली गईं।
संक्रमित होते हुए भी चलाईं कक्षाएं
इंग्लिश मीडियम स्कूल रसूलपुरा हरहुआ की सहायक अध्यापिका अर्चना शुक्ला ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान खुद कोरोना संक्रमित होने के बाद भी क्वारंटीन में भी ऑनलाइन शिक्षण कार्य किया। वहीं, गरीब अभिभावकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए भी आर्थिक मदद भी की और शिक्षण सामग्री के वीडियो बनाकर भी भेजे।