रहने के लिहाज से अच्छी नहीं बनारस में सुविधाएं, ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में काशी टॉप टेन में शामिल नहीं
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स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित हो रहे बनारस में भले ही सुविधाएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन रहने के लिहाज से इसकी रैकिंग देश भर में अच्छी नहीं मानी जा रही है। ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स और नगर पालिका प्रदर्शन सूचकांक में बनारस 27 वें पायदान पर है। हालांकि शहर में ढेर सारी विकास योजनाएं अभी धरातल पर नहीं उतरी हैं। माना जा रहा है कि विकास योजनाओं के पूर्ण होने पर बनारस की रैंकिंग में सुधार होगा।
केंद्रीय आवास और शहरी मामले के मंत्रालय की जारी रैकिंग में देश भर के शहरों को शामिल किया गया था। इन शहरों में किए गए सर्वे के लिए चार संकेतकों के आधार पर परखा गया। इसमें जीवन की गुणवत्ता, आर्थिक क्षमता, विकास की स्थिरता और नागरिकों की समझ को आधार बनाया गया है।
इस तरह के सर्वे में 111 शहरों के 32.2 लाख लोगों की राय जानी गई। बनारस में पेयजल, सीवर, सड़क, गंदगी समेत कई मूलभूत समस्याओं में सुधार नहीं हुआ है। नागरिकों की समझ की बात की जाए तो सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाना, पान खाकर थूकना और कूड़ा निस्तारण के मामले में स्थितियां बेहतर नहीं हैं। नगर निगम की ओर से जागरूकता अभियान के बाद भी लोगों की आदतों में बदलाव नहीं हो सका है।
धर्म, कला और संस्कृति की नगरी है काशी
बनारस देश की सांस्कृतिक राजधानी है। धर्म, कला और संस्कृति की नगरी होने के कारण देश और विदेश से पर्यटकों का आगमन होता रहता है।
समस्याएं
-वायु प्रदूषण
-सीवर
-सड़क
-पेयजल
नागरिकों की सहभागिता भी है जरूरी
आर्किटेक्ट आरसी जैन ने बताया कि किसी भी शहर में रहने के लिहाज से यातायात, सुनियोजित विकास, सुनियोजित रहन-सहन और विकास कार्यों में नागरिकों की सहभागिता बेहद आवश्यक होती है। बनारस में ट्रैफिक की समस्या गंभीर है। गलियों के शहर में सुनियोजित ढंग से विकास नहीं हो सका है। शहर में ग्रीन एरिया का अभाव होने के कारण नागरिकों को दूषित वातावरण का सामना करना पड़ता है।
बड़े शहरों में लिविंग एरिया और बिजनेस एरिया अलग-अलग होते हैं लेकिन बनारस में इसका अभाव है। बात करें स्वास्थ्य सुविधाओं की तो नागरिकों को यहां की स्वास्थ्य सुविधाओं पर विश्वास नहीं है। कई महत्वपूर्ण कारणों से बनारस इज आफ लिविंग की रैकिंग में पिछड़ा है।