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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi Police arrested 10 women for committing cyber fraud under guise of fake marriage bureau

UP: सात फेरे से पहले सात राज्यों के 700 दूल्हे-दुल्हन से 10 लाख की ठगी, सरगना समेत 10 आरोपी महिलाएं गिरफ्तार

Wed, 29 Jul 2026 10:00 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 29 Jul 2026 10:00 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी पुलिस ने साइबर ठगी के आरोप में 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने अब तक 700 दूल्हे-दुल्हन से करीब 10 लाख रुपये की ठगी की है।

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Varanasi Police arrested 10 women for committing cyber fraud under guise of fake marriage bureau
पुलिस के गिरफ्त में आरोपी महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सात फेरे लेने से पहले ही 700 दुल्हन और दूल्हे से 10 लाख की साइबर ठगी की गई। सात राज्यों के जोड़ों से ठगी में शुभ मैट्रिमोनियल साइट की संचालिका और गिरोह की सरगना रागिनी देवी सहित 10 को पुलिस ने गिरफ्तार किया। विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी में संचालित फर्जी कॉल सेंटर से विभिन्न राज्यों के इच्छुक जोड़ों से आजीवन सदस्यता और पंजीकरण के नाम पर रकम ऐंठते थे। कैंट पुलिस ने आरोपियों के पास से 27 मोबाइल, एक टैबलेट, तीन चेकबुक, एक पासबुक, पांच डेबिट कार्ड और चार बिल बाऊचर भी जब्त किए। 

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तीन क्यूआर कोड और रजिस्टर, किराया समझौता, उद्यम पंजीकरण दस्तावेज और ’शुभ मैट्रिमोनियल’ के पंजीकरण फॉर्म भी मिले हैं। मंगलवार को कोर्ट ने गिरोह की सरगना समेत 10 आरोपियों को जेल भेज दिया। डीसीपी क्राइम नीतू ने बताया कि गिरोह ने हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, चंडीगढ़, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के 700 लोगों के साथ ठगी की है। 
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आरोपियों में सरगना के अलावा हुकुलगंज निवासी अराध्या शर्मा, आवास विकास कॉलोनी पांडेयपुर की ज्योति सिंह, नदेसर राजा बाजार की रूबी, पहड़िया निवासी सपना यादव, पांडेयपुर पंचक्रोशी निवासी महक, गिलट बाजार निवासी शमा, शिवपुर निवासी विधि श्रीवास्तव, छावनी के सदर बाजार निवासी रायमा परवीन, शिवपुर की अजमत फातमा हैं। 

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एसीपी कैंट अपूर्व पांडेय ने बताया कि गिरोह पहले समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करवाता था। विज्ञापनों में विवाह योग्य युवक-युवतियों के भ्रामक विवरण होते थे। लोग विज्ञापन देखकर नंबरों पर संपर्क करते थे। आजीवन सदस्यता और पंजीकरण के नाम पर रकम ऐंठते थे। पैसे मिलने के बाद ठग पीड़ितों का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देती थीं। 

दो पीड़िताओं की शिकायत पर गिरोह का राज उजागर
एक महिला शिकायतकर्ता से चार किस्तों में 7000 रुपये और एक अन्य शिकायतकर्ता से 3500 रुपये सदस्यता शुल्क के नाम पर जमा कराए गए। रकम मिलने के बाद न तो किसी योग्य युवक-युवती का वास्तविक संपर्क उपलब्ध कराया गया और न ही सदस्यता शुल्क वापस किया गया। जांच में पता चला कि फर्जी कारोबार संचालित किया जा रहा था। मैरिज ब्यूरो में काम करने वाली युवतियों को दिन भर में 20 कॉल का टारगेट दिया जाता था। वसूली गई रकम के आधार पर युवती को कमीशन दिया जाता था।

ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
एसीपी साइबर विनय द्विवेदी ने बताया कि धोखाधड़ी का पता चलते ही तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें। ''गोल्डन आवर'' (शुरुआती 1-2 घंटे) में शिकायत करने पर बैंक खातों को फ्रीज कर पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। गृह मंत्रालय के आधिकारिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें। ठग की प्रोफाइल का यूआरएल, बातचीत के स्क्रीनशॉट, वॉयस रिकॉर्डिंग और पैसे ट्रांसफर के बैंक ट्रांजेक्शन स्लिप को सबूत के तौर पर संभाल कर रखें।
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