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बनारस में बेपरवाह अफसरशाही, सीएम का आदेश भी हवा में, एफआईआर की जगह दिया नोटिस  

Tue, 07 Aug 2018 10:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 07 Aug 2018 10:43 AM IST
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Varanasi officer did not follow CM yogi adityanath order
सीएम योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री के आदेश पर बेपरवाह अफसरशाही ने काम में हीलाहवाली करने वाली एजेंसियों पर एफआईआर दर्ज कराने की बजाय नोटिस जारी कर कागजी खानापूर्ति कर ली है।
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बनारस के दीनापुर एसटीपी और शाही नाला की सफाई में हीलाहवाली पर नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वाराणसी दौरे पर दोनों जगहों पर काम कर रही एजेंसियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया था। बावजूद दोनों एजेंसियों पर मुकदमा दर्ज नहीं होने को लेकर प्रशासनिक मशीनरी अनजान बनी है।
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सबसे अहम बात यह है कि नौ अगस्त को मुख्यमंत्री फिर वाराणसी दौरे पर आ रहे हैं, मगर अफसरों में सीएम के दोबारा आगमन का भी भय नहीं है। 170 करोड़ की लागत से बन रहे 140 एमएलडी क्षमता का दीनापुर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को जून 2018 में शुरू होना था।
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तीन बार समय सीमा बढ़ने के बाद भी अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया। इस एसटीपी का निर्माण कर रही वीए टेक लिमिटेड को शासन की ओर से 150 करोड़ रुपये जारी कर दिया गया है। मगर, दीनापुर एसटीपी का काम 85 फीसदी ही हुआ है।

उधर, 84 करोड़ रुपये की लागत से शहर के ओल्ड ट्रंक सीवर शाही नाले का मरम्मत श्रीराम ईपीएच लिमिटेड ने कार्य शुरू किया था। इस कार्य को छह माह पहले ही पूरा होना था। अब तक कंपनी मात्र 50 प्रतिशत ही कार्य कर पाई है। जबकि शासन ने इस कार्य के लिए अब तक 35 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी किया है।

जबकि अस्सी से लेकर खिड़किया घाट तक 7.5 किमी लंबे इस नाले को साफ करने और उसकी मरम्मत करने का काम दिया गया है, लेकिन कंपनी केवल मच्छोदरी तक ही कार्य कर पाई है। पिछले दिनों इस कंपनी पर सात करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। 

कुछ हुआ सुधार अभी और भी जरूरत

Varanasi officer did not follow CM yogi adityanath order
बैठक करते सीएम योगी - फोटो : file photo
रविवार को काशी पहुंचे मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक को फटकार लगाई थी और काम में लापरवाही कर रही दोनों एजेंसियों पर एफआईआर को कहा था। गंगा प्रदूषण इकाई के अधिकारियों ने इन कंपनियों पर एफआईआर दर्ज कराने की बजाय उनको अंतिम नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा हैं।

शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर आयुक्त को शहर की सफाई कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद सोमवार को सफाई व्यवस्था काफी हद तक सुधरी लेकिन अभी भी सुधार होना बाकी है। शहर में सीवर की सफाई व्यवस्था के लिए एक कंपनी को नियुक्त किया गया है, लेकिन वह कंपनी काम नहीं कर पा रही है।

अब तक उसको तीन नोटिस जारी हो चुका है। अब कंपनी की सिक्योरिटी मनी को जब्त कर उसे हटाने की तैयारी है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम एसके राय का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश पर दोनों कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है। यह अंतिम नोटिस है। इस नोटिस के बाद ही कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए उनको ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा।
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