वाराणसी: नाटी इमली के भरत मिलाप से जुड़ेंगे देश-दुनिया के श्रोता, आकाशवाणी पर लाइव प्रसारण
नाटी इमली के ऐतिहासिक भरत मिलाप का सजीव प्रसारण 22 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे से आकाशवाणी वाराणसी पर होगा। इसे मीडियम वेव 1242 KHz, विविध भारती एफएम 100.6 MHz के साथ NewsOnAir ऐप, Waves OTT और DTH के जरिए देश-विदेश में सुना जा सकेगा।
विस्तार
काशी के ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध नाटी इमली के भरत मिलाप का सजीव प्रसारण 22 अक्टूबर को आकाशवाणी वाराणसी से किया जाएगा। प्रसारण दोपहर 3:45 बजे से मीडियम वेव 1242 KHz और विविध भारती एफएम 100.6 MHz पर सुना जा सकेगा। इसके अलावा देश-विदेश के श्रोता NewsOnAir ऐप, Waves OTT और DTH सेवा के माध्यम से भी इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़ सकेंगे।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
नाटी इमली का भरत मिलाप वाराणसी के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। इसमें भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत के मिलन का भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया जाता है। यह आयोजन काशी की सदियों पुरानी रामलीला परंपरा, जनआस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। आकाशवाणी के सजीव प्रसारण के जरिए आयोजन स्थल से दूर रहने वाले लोग भी भरत मिलाप के प्रमुख प्रसंगों और वहां के माहौल से जुड़ सकेंगे।
विशेषज्ञ देंगे कमेंट्री
विशेष सजीव प्रसारण में प्रख्यात शिक्षाविद्, वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया विशेषज्ञ प्रो. राममोहन पाठक तथा आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक अरुण कुमार पाण्डेय कमेंट्री करेंगे। प्रो. राममोहन पाठक भरत मिलाप की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, धार्मिक महत्ता, सांस्कृतिक परंपरा और श्रीराम-भरत मिलन के भावनात्मक पक्ष की जानकारी देंगे। वहीं अरुण कुमार पाण्डेय आयोजन के प्रमुख प्रसंगों और उनकी विशेषताओं को क्रमबद्ध तरीके से श्रोताओं तक पहुंचाएंगे।
आयोजन स्थल से आंखों देखा हाल
आशुतोष कुमार आयोजन स्थल से प्रत्यक्ष कमेंट्री करेंगे। वह वहां के माहौल, श्रद्धालुओं की मौजूदगी, तैयारियों और आयोजन के दौरान होने वाले प्रमुख दृश्यों का आंखों देखा हाल श्रोताओं तक पहुंचाएंगे। इससे रेडियो के जरिए जुड़े श्रोता भी आयोजन की जीवंतता को महसूस कर सकेंगे।
काशी की परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने की पहल
आकाशवाणी वाराणसी क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और लोककलात्मक विरासत को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। नाटी इमली के भरत मिलाप का सजीव प्रसारण भी इसी प्रयास का हिस्सा है।
ऐसे आयोजनों के प्रसारण से काशी की सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों में रहने वाले लोगों को भी काशी की लोकआस्था से जुड़ने का अवसर मिलता है।
आकाशवाणी वाराणसी के कार्यक्रम प्रमुख प्रफुल्ल कुमार सिन्हा ने श्रोताओं से इस विशेष सजीव प्रसारण से जुड़ने और काशी की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा के इस अवसर का सहभागी बनने की अपील की है।