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वाराणसी नाव हादसा: ओवरलोड नाव देख कार्रवाई नहीं करती जल पुलिस, इसी वजह से मनमानी

Tue, 08 Dec 2020 01:32 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: विचित्र सिंह Updated Tue, 08 Dec 2020 01:32 AM IST
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Varanasi boat accident water police do not act due to overload boat in Ganga
नावों में घूमते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी करें तो गंगा में ओवरलोड नावों का संचालन बंद हो जाए। हालांकि जल पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी ऐसा करते नहीं हैं। ओवरलोड नाव दिखाई देने के बाद भी कार्रवाई की बजाए सिर्फ चेतावनी देने तक ही सारा मामला सीमित रहता है। नतीजतन, नाविकों की मनमानी जारी रहती है।

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जल पुलिस चौकी में एक प्रभारी के अलावा 18 अन्य कर्मचारी हैं। चौकी में 55 से ज्यादा लाइफ जैकेट और अन्य संसाधनों से लैस आधुनिक नौ नावें हैं। जल पुलिस चौकी की कार्यशैली की बात करें तो इस वर्ष अब तक एक भी ओवरलोड नाव के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। जबकि जल पुलिस चौकी के सामने और आसपास से ही ओवरलोड नाव लेकर नाविक गंगा में आगे बढ़ते हैं।

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Varanasi boat accident water police do not act due to overload boat in Ganga
जानकी घाट के सामने सोमवार को खोजबीन करते गोताखोर। - फोटो : अमर उजाला।

जल पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों ने बताया कि रोजाना सुबह, दोपहर और शाम के समय एनाउंस कर नाविकों को समझाया जाता है कि नाव की क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं। नाविकों को आगाह करने के लिए घाटों पर जगह-जगह फ्लैक्स भी लगाए गए हैं। निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाले नाविकों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती, इस सवाल पर जल पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी कोई भी उत्तर नहीं दे पाए।

आठ लोगों की जान बचाने में नाविकों की अहम भूमिका

गंगा में डूबी नाव के नाविक, दो युवतियों और पांच युवकों की जान बचाने में भदैनी और आसपास के घाटों पर मौजूद नाविकों की ही अहम भूमिका रही। सोमवार को भदैनी घाट पर मौजूद नाविक भरोस साहनी ने बताया कि उन लोगों ने रविवार को जब नाव को गंगा में डूबते देखा तो अपनी नावें लेकर तेजी से आगे बढ़े। नाविक अंगद, दीपू और कृष्णा आदि की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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