वाराणसी नाव हादसा: पथराई आंखें गंगा में खोज रही थीं कलेजे के टुकड़े को, बहते रहे आंसू
- चारों युवकों के परिजन टकटकी लगाए बैठे रहे भदैनी घाट पर, साथ आए लोग बंधा रहे थे ढांढस
- चारों परिवारों का दु:ख एक जैसा, लिहाजा कोई किसी को सांत्वना देने की स्थिति में नहीं था
विस्तार
वाराणसी में भदैनी घाट के सामने गंगा में ओवरलोड नाव का डूबना चार परिवारों के लिए बेहद दुखदायी साबित हुआ। सोमवार को चारों परिवारों के लोग घाट पर बैठकर गंगा की ओर उम्मीद भरी टकटकी लगाए हुए थे। चारों परिवारों का दु:ख एक जैसा ही था, लिहाजा कोई किसी को सांत्वना देने की स्थिति में नहीं था। इन सभी को उनके करीबी संभाले हुए थे।
शिवपुर थाना अंतर्गत लक्ष्मणपुर क्षेत्र की गंगोत्री विहार कॉलोनी निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक मौर्य के पिता राजेश मौर्य प्रयागराज में कृषि विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। मां-बाप का इकलौता बेटा होने से अभिषेक के परिजनों की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
अभिषेक की कॉलोनी में रहने वाले उसके दोस्त विशाल के परिजनों का भी यही हाल था। अपने पिता के बुनकरी के काम में हाथ बंटाने वाले शाहिद जुनैद और शाहनवाज के परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। चारों युवकों के परिजनों में से कोई अपनी किस्मत को कोस रहा था तो कोई नाविक को अपने दुख के लिए कसूरवार ठहरा रहा था। युवकों के शव बारी-बारी से बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो परिजनों के विलाप से वहां का माहौल भी गमगीन हो उठा।
एमसीए कर चुके विशाल का हुआ था कैंपस प्लेसमेंट
विशाल दो भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा था। जालंधर से एमसीए करने के बाद कैंपस प्लेसमेंट हुआ था। विशाल का शव गंगा से बाहर निकाला गया तो उसके रिटायर्ड फौजी पिता अनिल कुमार सिंह ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। काफी देर तक पुलिस उन्हें समझाती रही कि पोस्टमार्टम जरूरी है। तब जाकर शव को बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस के लिए भेजा गया। विशाल का शव देख कर बैंक में काम करने वाले अनिल, उनकी पत्नी सुमन की हालत बेसुधों जैसी थी। परिजन बड़ी मुश्किल से चारों को संभाले हुए थे।