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बहती गंगा तो बचा ली, ठहरे तालाब मर गए
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 25 Oct 2015 01:53 AM IST
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दशहरा और दुर्गा पूजा के बाद अब कुंडों-घाटों की साफ-सफाई की चुनौती खड़ी हो गई है। प्रतिमा विसर्जन वाले कुंडों की सफाई का काम नगर निगम प्रशासन ने शनिवार से शुरू कराया लेकिन अभी इसमें कम से कम हफ्ते भर का समय लगेगा।
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जबकि, पखवारे भर से दुर्गा पूजा और दशहरे के मद्देनजर शहर में दबाव बढ़ने से गंगा घाटों की सफाई भी ठप पड़ी है। तुलसी घाट, दशाश्वमेध, अस्सी और शिवाला समेत अन्य घाटों पर कूड़ा-गंदगी के अंबार से मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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नगर निगम और प्रशासन की ओर से शहरी क्षेत्र में लक्ष्मीकुंड, मछोदरी कुंड, कंपनी बाग, ईश्वरगंगी, शंकुलधारा तालाब, राय साहब का पोखरा, पहड़िया पोखरा, गणेश पोखरा और भिखारीपुर तालाब को मूर्ति विसर्जन के लिए चिह्नित किया गया था। शनिवार को इन स्थानों पर सफाई अभियान चला फिर भी तालाब किनारे मूर्तियों के अवशेष पड़े रहे।
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शंकुलधारा पोखरे में विसर्जन के बाद किनारे पर पुआल और लकड़ी पड़ी थी। लक्ष्मीकुंड में देर रात तक सफाई का काम हुआ। हालांकि यहां सफाई के दौरान विसर्जित मूर्ति को निगम की कूड़ा गाड़ी से उठाने पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी भी जताई।
मूर्ति विसर्जन के लिए खिड़किया घाट, रामनगर और विश्वसुंदरी पुल के पास बने गंगा सरोवरों में भी मूर्ति विसर्जन के बाद फूल-माला और कचरा फैला हुआ है।
उधर, गंगा घाटों की सफाई की ओर भी निगम प्रशासन ध्यान नहीं दे पा रहा है। तुलसी घाट, अस्सीघाट और शिवाला घाट पर जगह-जगह गंदगी पसरी है। निगम प्रशासन का कहना है कि कुंडों-तालाबों की सफाई के बाद गंगा घाटों की सफाई के लिए विशेष अभियान जल्द शुरू किया जाएगा।