बीएचयू: शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने से गरमाया माहौल, छात्रों के दो गुट आमने-सामने
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बीएचयू में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद माहौल गरमा गया है। पिछले दिनों अभ्यर्थियों और छात्रों के धरने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन से जिस साक्षात्कार को स्थगित कर दिया था, उसे फिर शुरू कर दिया गया है।
इसके विरोध में छात्रों ने सोमवार को होलकर हाउस गेट के सामने धरना देकर नारेबाजी की। उधर विवाद गरमाता चला जा रहा है और स्थिति यह रही कि दो गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक गुट जहां प्रक्रिया का विरोध कर रहा है तो दूसरे गुट के छात्रों ने भी विरोध में एलडी गेस्ट हाउस चौराहे पर धरना दिया।
शिक्षक नियुक्ति में यूजीसी की ओर से दी गई नेट की डिग्री(कैटगरी लिखी) को अमान्य करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवेदकों का नाम सूची से बाहर कर दिया था। इसके विरोध में भी छात्रों ने 15 अक्तूबर को धरना दिया। हालांकि इस दौरान विश्वविद्यालय ने यूजीसी को पत्र भेजकर यह बताया कि यूजीसी का जवाब आने के बाद ही साक्षात्कार होगा।
इस बीच सोमवार को फिर साक्षात्कार शुरू हो गया तो सुबह 6 बजे ही अभ्यर्थी कुलपति आवास के सामने होलकर हाउस पहुंचकर धरने पर बैठ गए। विश्वविद्यालय प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए यूजीसी का जवाब आने के बाद साक्षात्कार करने की मांग करने लगे। उधर दोपहर में एलडीगेस्ट हाउस चौराहे पर कुछ छात्र इस धरने के विरोध में बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि नियुक्ति पर विरोध गलत है।
बैरिकेडिंग लगाकर रोका रास्ता, अलर्ट रही पुलिस
छात्रों के दो गुटों के अलग-अलग जगहों पर धरना देने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति आवास के सामने और एलडी गेस्ट हाउस चौराहे के पास बैरीकेडिंग लगाकर रास्ता रोक दिया। सुबह से लेकर शाम करीब 5 बजे तक दोनों तरफ से आवागमन बाधित रहा और लोगों को बाहर निकलने के लिए पेट्रोल पंप होते हुए नरिया जाना पड़ा। उधर चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओपी राय के नेतृत्व में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य और पुलिस, पीएसी के जवान भी मुस्तैद रहे।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
शिक्षक नियुक्ति पर सवाल उठाने के साथ ही धरनारत अभ्यर्थियों और छात्रों ने सोमवार को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसीएम चतुर्थ को सौंपा। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नियमों का उल्लंघन करने का हवाला देते हुए प्रकरण की जांच कराकर जरूरी कार्रवाई की मांग की है। इसके पहले भी पिछड़ा वर्ग आयोग, एससी,एसटी आयोग से भी शिकायत की गई थी। अब मामला राष्ट्रपति के वहां पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और यूजीसी जल्द ही कोई अहम फैसला ले सकता है।