Rangbhari Ekadashi: गौने के बाद पहली बार स्वर्णिम गर्भगृह में प्रवेश करेंगी माता पार्वती , तीन को पालकी यात्रा
माता पार्वती की गौना उत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रंगभरी एकादशी पर तीन मार्च को पालकी यात्रा निकलेगी। बाबा विश्वनाथ जब उनका गौना कराकर शिवधाम लौटेंगे तो मां गौरा स्वर्णमंडित गर्भगृह में पहली बार प्रवेश करेंगी।
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रंगभरी एकादशी मां पार्वती के लिए बेहद खास होगी। बाबा विश्वनाथ जब उनका गौना कराकर शिवधाम लौटेंगे तो मां गौरा स्वर्णमंडित गर्भगृह में पहली बार प्रवेश करेंगी। काशी में रंगों की छठा शिवरात्रि के दिन से ही शुरू हो जाती है, लेकिन बाबा की नगरी में एक दिन ऐसा भी रहता है, जब बाबा खुद अपने भक्तों के साथ होली खेलते हैं।
रंगभरी एकादशी के दिन बाबा की मां गौरा के साथ चल प्रतिमा निकलती है। इसी दिन से काशी में होली की शुरुआत मानी जाती है। बाबा के भाल पर मथुरा के जेल में अरारोट और सब्जियों से कैदियों द्वारा तैयार गुलाल सजेगा।
माता गौरा को ससुराल का नियम समझाया गया
चला हौ गौरा ऊंचे पहड़वा, तोहरा के भोला बोलउले बा... की धुन से माता गौरा का मायका गूंज उठा। महिला श्रद्धालुओं ने माता गौरा को बेटी के रूप में आशीष देकर ससुराल के नियम समझाए। इस दौरान दूसरी तरफ गौना उत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रंगभरी एकादशी पर तीन मार्च को पालकी यात्रा में बाबा सूरत से आई राजशाही पोशाक पहनकर निकलेंगे तो वहीं माता गौरा अपने गौने पर बरसाने का घाघरा पहनेंगी। बाबा विश्वनाथ का गौरा के मायके में डेढ़ सौ बटुक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्वागत करेंगे।
सूरत से आई खादी राजशाही पोशाक
बुधवार शाम को सूरत से आई खादी राजशाही पोशाक व बरसाने से आए लहंगे की पूर्व महंत के आवास पर विधिवत पूजा की गई। आचार्य सुशील त्रिपाठी ने पालकी एवं राजशाही पोशाक का पूजन कराया। टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास पर गौरा के विग्रह के समक्ष सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली ने संध्या बेला में अचल सुहाग की कामना के साथ मंगलगीत गाए।
उत्सव में ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने गौरा को ससुराल के नियम समझाए। दूल्हे के स्वागत के लिए कौन-कौन से पकवान पकाए जा रहे हैं, सखियां पार्वती का साज शृंगार करने के लिए कैसे-कैसे सुंदर फूल चुन कर ला रही हैं, इसका भी बखान मंगलगीत में किया। लोक संगीत के बीच शिव-पार्वती के मंगल दांपत्य की कामना पर आधारित पारंपरिक गीतों का क्रम देर तक चला।
गुरुवार को ससुराल पहुंचेंगे भोले बाबा
माता गौरा को विदा कराने के लिए भोले बाबा गुरुवार को ससुराल पहुंचेंगे। भोले बाबा के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं। ठंडई, मेवे और पकवान की व्यवस्था की जा रही है। तीन मार्च को रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।