रामबिहारी चौबे हत्याकांड: शूटर और वादी का बयान, साजिशकर्ता के तौर पर आया था भाजपा विधायक सुशील का नाम
वाराणसी के चौबेपुर थाना अंतर्गत श्रीकंठपुर निवासी बसपा नेता रामबिहारी चौबे की हत्या में चंदौली के सैयदराजा के भाजपा विधायक सुशील सिंह का नाम गिरफ्तार एक शूटर और वादी के बयान के आधार पर पुलिस ने मुकदमे की विवेचना में शामिल किया था। हालांकि बाद में चौबेपुर थाने की पुलिस ने ही विधायक सुशील सिंह को क्लीन चिट देते हुए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिला पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए तल्ख टिप्पणी की है।
बसपा नेता रामबिहारी चौबे के पुत्र अमरनाथ चौबे ने सोमवार को अमर उजाला को बताया कि छह अप्रैल 2017 की सुबह चौबेपुर थाने की पुलिस शूटर अजय मरदह, आशुतोष और राजू बिहारी को गिरफ्तार करने चांदमारी स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट में गई थी। तीनों बदमाशों की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए विधायक सुशील सिंह मौके पर पहुंच गए थे। घंटों की हुज्जत के बाद भी पुलिस ने विधायक की एक न सुनी थी और तीनों बदमाशों के खिलाफ पर्याप्त सबूत बताते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
इसके बाद उनके और राजू बिहारी के बयान के आधार पर पुलिस ने सुशील सिंह का नाम मुकदमे में आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोपी के तौर पर शामिल किया था। राजू बिहारी की कार्रवाई शिनाख्त की प्रक्रिया भी जिला जेल में वारदात स्थल पर मौजूद एक व्यक्ति द्वारा की गई थी। इसके अलावा उनके पिता रामबिहारी चौबे ने भी हत्या से पहले पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा था कि उनकी जान को सुशील सिंह से खतरा है। अमरनाथ ने बताया कि उनके पिता के हत्या के मुकदमे की विवेचना आठ विवेचकों ने की थी। इसके बावजूद उनके व शूटर के बयान और पिता के द्वारा पूर्व में लिखे गए पत्रों को खारिज करते हुए चौबेपुर थाने की पुलिस ने एमएलए सुशील सिंह को क्लीन चिट दे दी थी। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी उन्हें और गवाहों को पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा रही है।
छह गोली मार कर की गई थी रामबिहारी चौबे की हत्या
वाराणसी के चौबेपुर थाना अंतर्गत श्रीकंठपुर निवासी बसपा नेता रामबिहारी चौबे को छह गोली मार कर उनकी हत्या की गई थी। सेंट्रल जेल में निरुद्ध एमएलसी बृजेश सिंह के करीबी रामबिहारी चौबे के घर में घुस कर अलसुबह की गई उनकी हत्या जिले में ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के अन्य जनपदों में भी महीनों तक सुर्खियों में थी। हालांकि इस वारदात का दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि तकरीबन एक साल चार माह बाद तीन बदमाश गिरफ्तार किए गए थे।
चार दिसंबर 2015 की सुबह श्रीकंठपुर निवासी बसपा नेता रामबिहारी चौबे के घर में घुस कर दो बदमाशों ने उनका पैर छूने के बाद अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी थी। वारदात के दौरान दो अन्य बदमाश रामबिहारी के दरवाजे के समीप खड़े थे। बसपा नेता के बेटे अमरनाथ चौबे ने बताया कि पिता की हत्या के दौरान वह दिल्ली में थे। सूचना मिलते ही वापस घर लौट कर आए तो उनकी दुनिया ही उजड़ गई थी और सिर से पिता का साया उठ चुका था। उन्हें कई लोगों ने तब कहा था कि मुकदमा सोच-समझ कर और नामजद दर्ज कराओ। उन्हें उस समय कुछ समझ में नहीं आ रहा था, इसलिए उन्होंने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
चौबेपुर थाने की पुलिस एक साल चार महीने तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। एसटीएफ की वाराणसी इकाई के इनपुट के आधार पर छह अप्रैल 2017 को तत्कालीन चौबेपुर थानाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार तिवारी ने गाजीपुर के मरदह निवासी शार्प शूटर अजय मरदह व आशुतोष सिंह सनी और बिहार के भभुआ निवासी नागेंद्र सिंह उर्फ राजू बिहारी को गिरफ्तार किया था। फिलहाल अजय मरदह और राजू बिहारी जेल में ही निरुद्ध हैं, जबकि आशुतोष जमानत पर बाहर है। अमरनाथ ने कहा कि वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों और साजिशकर्ताओं को भी सजा मिले तभी उनके पिता की आत्मा को शांति मिलेगी।
पुलिस ने भरोसा तोड़ा तो गए न्यायालय की शरण में
अमरनाथ चौबे ने बताया कि उनके पिता की हत्या के मुकदमे की विवेचना में आठ विवेचक बदले गए। पुलिस हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य और तथ्यों की लगातार अनदेखी करती रही और इसके पीछे अजब-गजब तर्क दिए जाते थे। इससे निराश होकर हम सितंबर 2018 में उच्चतम न्यायालय की शरण में गए। इसके बाद भी पुलिस यही कहती थी कि अब इस प्रकरण में कुछ खास नहीं बचा है और न्यायालय की शरण में जाने से भी कोई फायदा नहीं होगा। अब उम्मीद जगी है कि न्याय मिलेगा।