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Varanasi: पूर्वांचल विद्युत निगम के निदेशक तकनीकी पर भ्रष्टाचार का मुकदमा, काली कमाई पर विजिलेंस की कार्रवाई

Sun, 26 Feb 2023 06:42 PM IST
उत्पल कांत पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 26 Feb 2023 06:42 PM IST
सार

वर्ष 2020 से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में  डायरेक्टर (टेक्निकल) के पद पर तैनात पृथ्वीपाल सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। विजिलेंस के इंस्पेक्टर ने आय से अधिक संपत्ति के आरोप में वाराणसी में मुकदमा दर्ज कराया है। 

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Purvanchal Vidyut Vitran Nigam director technical accused for corruption
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक (तकनीकी) पृथ्वीपाल सिंह के खिलाफ वाराणसी के चितईपुर थाने में आय से अधिक संपत्ति हासिल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। विजिलेंस के इंस्पेक्टर चंद्रभूषण प्रजापति ने जो तहरीर दी है, उसके मुताबिक निदेशक ने आय से 97 लाख रुपये ज्यादा कमाई की है। वाराणसी सहित कई शहरों में संपत्ति बनाई है।

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इस कार्रवाई से निगम के अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। गौरतलब है कि पृथ्वीपाल सिंह वाराणसी में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक (तकनीकी) के पद पर फरवरी 2020 से तैनात हैं।
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आय से 97 लाख रुपये ज्यादा खर्च
उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लखनऊ स्थित मुख्यालय के अध्यक्ष ने पृथ्वीपाल सिंह की संपत्ति की जांच के लिए विजिलेंस को कहा था। जांच में सामने आया कि एक जून 1986 से 30 जून 2022 तक पृथ्वीपाल सिंह की आय चार करोड़ 62 लाख 82 हजार 776 रुपये थी। लेकिन, इस अवधि में उनके द्वारा पांच करोड़ 60 लाख 62 हजार 667 रुपये खर्च किए गए।

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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस

इस तरह से पृथ्वीपाल सिंह ने अपनी आय से 97 लाख 79 हजार 891 रुपये ज्यादा खर्च किए। यह रुपये पृथ्वीपाल सिंह द्वारा वैध स्त्रोतों से अर्जित आय से 21.13 प्रतिशत ज्यादा है। यह रुपये कहां से आए, इसकी पड़ताल की जा रही है। 

इंस्पेक्टर चंद्रभूषण प्रजापति के अनुसार जांच में सामने आया कि पृथ्वीपाल सिंह ने वैध कमाई से ज्यादा खर्च किया। यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए पृथ्वीपाल के खिलाफ चितईपुर थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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