यूपी: काशी के पुरोहितों के लालू यादव, अनिल कपूर, मल्लिका शेरावत तक यजमान, करवा रहे अनुष्ठान; बढ़ी डिमांड
यहां के पंडित मुंबई, दिल्ली, पटना से लेकर विदेश तक धार्मिक अनुष्ठान करा रहे हैं। इनके यजमानों में लालू प्रसाद यादव, अनिल कपूर और मल्लिका शेरावत जैसी चर्चित हस्तियां भी शामिल हैं। काशी के पुरोहित वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ, हवन और विशेष अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं। इससे काशी की धार्मिक परंपरा और पुरोहितों की मांग का दायरा बढ़ रहा है।
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काशी के 400 पंडित और पुरोहित विभिन्न प्रांतों के अलावा अमेरिका, रूस, थाईलैंड और दुबई जैसे देशों में नवरात्र में भक्ति की अलख जगा रहे हैं। पटना में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के परिवार, मुंबई में अभिनेता अनिल कपूर, मल्लिका शेरावत तक भगवती को समर्पित अनुष्ठान इनसे करवा रहे हैं।
विदेशों में जाकर उद्यमी से लेकर नामचीन हस्तियों के घरों में दुर्गा सप्तशती, वन दुर्गा पाठ, शतचंडी यज्ञ, लक्ष्य चंडी यज्ञ, नवचंडी यज्ञ अनुष्ठान करवा रहे हैं। काशी के वैदिक विद्वान, पंडितों और पुरोहितों की नवरात्र में देश-विदेश में मांग बढ़ी है।
आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री, आचार्य गौरव द्विवेदी व आचार्य राघव द्विवेदी से पटना में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजप्रताप यादव सहित अन्य सदस्यों ने नवचंडी महायज्ञ करवाए। आचार्य संतोष कुमार पाराशर ने मुंबई में अनिल कपूर के अलावा अमेरिका में दुर्गा नवचंडी अनुष्ठान करवाए।
आचार्य गौरव मिश्र ने पटना में मल्लिका शेरावत, आचार्य विकास व प्रत्युष ने वानखेड़े स्टेडियम में सामूहिक अनुष्ठान करवाए हैं। दिल्ली में एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के आवास पर नवचंडी अनुष्ठान भी कराया। भोपाल सरकार के कई मंत्री भी यहां के वैदिक विद्वानों को बुलाकर अनुष्ठान करवा रहे हैं।
आचार्य गोविंद पांडेय ने दुबई में शतचंडी यज्ञ करवाया। कोलकाता में आचार्य धनंजय पांडेय, झारखंड में आचार्य आकाश मिश्र, आचार्य नरेंद्र राजस्थान में करवा अनुष्ठान करवा रहे हैं। आचार्य दिव्यांशु द्विवेदी थाईलैंड में हवन पूजन करवा रहे हैं। रूस की इंगा नीना ने काशी के विद्वानों से ऑनलाइन नवरात्र की पूजा करवाई।
फ्रांस के फ्रेंकोइफ ने दीक्षा लेकर बने मोहन दास
काशी के वैदिक विद्वान संजय उपाध्याय से देश-विदेश के श्रद्धालु माता दुर्गा और 32 नाम की दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं। संजय से फ्रांस के फ्रेंकोइफ ने महामृत्युंजय मंदिर में दस महाविद्या की पूजा करवाई और उनसे गुरु दीक्षा ली। दीक्षा के बाद उनका नाम मोहन दास मिला है।