बीएचयू में रेमडेसिवीर इंजेक्शन खरीद मामले में पीएमओ ने मांगी रिपोर्ट, अमर उजाला की खबर का लिया संज्ञान
बीएचयू के सुपरस्पेशियलिटी कांप्लेक्स में भर्ती कोरोना मरीजों के इलाज के लिए नि:शुल्क मिलने वाले रेमडेसिवीर इंजेक्शन बाहर से खरीदे जाने की अमर उजाला की खबर का प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन से जवाब मांगा है। इसके बाद जिलाधिकारी ने भी बीएचयू अस्पताल के एमएस और सीएमओ को पत्र भेजकर पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।
बीएचयू के सुपरस्पेशियलिटी कांप्लेक्स में कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। शासन के निर्देश पर यहां भर्ती मरीजों के लिए निशुल्क रेमडेसिवीर इंजेक्शन की व्यवस्था है, लेकिन कोरोना मरीजों को नि:शुल्क इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे इंजेक्शन आपूर्ति करने वाली फार्मेसी का बीएचयू पर बकाये का भुगतान न मिलना वजह है।
इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को बाहर से 3500 रुपये में इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है, जबकि इसकी कीमत ढाई हजार है और वह भी नि:शुल्क मिलना है। अमर उजाला में मरीजों की समस्याओं की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। अब जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने सीएमओ, बीएचयू अस्पताल के एमएस से मामले में जवाब तलब किया है, ताकि प्रधानमंत्री कार्यालय को इससे अवगत कराया जा सके। इधर, प्रधानमंत्री कार्यालय से जवाब तलब होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
...शिक्षकों की हड़ताल का संज्ञान, मांगा जवाब
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संविदा शिक्षकों के सत्याग्रह का पीएमओ ने संज्ञान ले लिया है। पीएमओ ने जिला प्रशासन से मामले की जानकारी मांगी तो जिलाधिकारी ने कुलसचिव को पत्र भेजकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
पीएमओ ने जिला प्रशासन से पत्र लिखकर पूछा है कि काशी विद्यापीठ में संविदा शिक्षक चार महीने से वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। बता दें कि काशी विद्यापीठ के मुख्य परिसर, गंगापुर और एनटीपीसी के 78 संविदा शिक्षक दो नवंबर से सत्याग्रह कर रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि कोरोना काल में उनसे मौखिक आदेश के जरिए काम भी लिया गया, लेकिन वेतन नहीं दिया गया। वहीं 17 नवंबर को कुलपति ने विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाने की बात कही थी, लेकिन वह भी नहीं हो सकी।
बुधवार को शिक्षकों ने कुलपति से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। सत्याग्रह स्थल पर डॉ. मानिक चंद्र पांडेय, डॉ. आनंद यादव, मदनलाल, राजेश कुमार, रमेश मिश्रा आदि मौजूद रहे। कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने बताया कि जिला प्रशासन के पत्र का जवाब दिया जाएगा।