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बनारस में मुन्ना बजरंगी के गुर्गों ने चलाई थी एके- 47, 18 गोलियां लगने के बाद भी जिंदा है ये शख्स

Mon, 09 Jul 2018 04:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 09 Jul 2018 04:17 PM IST
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Munna bajrangi shooter firing in varanasi by AK 47
आचार्य पंडित राजेंद्र त्रिवेदी - फोटो : अमर उजाला
कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की सोमवार सुबह बागपत जिला जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। कई जघन्य वारदातों को अंजाम देने वाले मुन्ना बजरंगी ने बनारस में एके 47 से गोली चलवाई थी।
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छह अप्रेल 1997 को वाराणसी के नरिया क्षेत्र में एके-47 से कुछ लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गई थी। इस हमले में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष रामप्रकाश पांडेय, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुनील राय, भोनू मल्लाह सहित चार लोगों की मौत हो गई  थी।
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ये सभी लोग एक कार पर सवार थे। ये सभी बीएचयू में भर्ती किसी नेता को देखकर वापस लौट रहे थे। लंका थाना क्षेत्र के नरिया में  पांच-छह की संख्या आए हमलावरों ने तकरीबन 150 गोलियां चलाई थी।
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यह हमला माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी ने कराया था। इस हत्याकांड के चश्मदीद गवाह आचार्य पंडित राजेंद्र त्रिवेदी को भी हमले में 18 गोलियां लगी थीं। वो भी उसी कार में सवार थे जिस पर हमला हुआ था।


बीएचयू अस्पताल में राजेंद्र त्रिवेदी ने करीब डेढ़ माह तक  जिंदगी और मौत से जंग लड़ा। खुद को अदम्य साहस का परिचय देते हुए उन्होंने खुद की जिंदगी बचाई। 
 

मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए उस दिन घटी घटना को विस्तार से बताया।  उन्होंने ये भी कहा कि जो लोग इस तरह निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या में शामिल थे उन्हें भगवान ने दंड दे दिया है।

इस बार मौत को नहीं दे सका गच्चा

Munna bajrangi shooter firing in varanasi by AK 47
मुन्ना बजरंगी की हत्या - फोटो : अमर उजाला
यूपी के बागपत जेल में कुख्यात डॉन मुन्ना बजरंगी इस बार मौत को मात नहीं दे सका। उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले वह कई बार मौत को गच्चा दे चुका था। एक बार पेशी के दौरान भी उस पर जानलेवा हमला हुआ था।

इससे वह बच निकला था। यहीं नहीं बजरंगी को जहर वाला इंजेक्शन देकर भी मारने की कोशिश हुई थी। इससे वह बेहोश हो गया था लेकिन तब भी बच निकला था।वो किस्सा 1998 का है जब बजरंगी ने दिल्ली पुलिस के दावों पर पानी फेर दिया था।

इंटर स्टेट गैंग नंबर 233 के सरगना और उस समय के पांच लाख रुपए के इनामी मुन्ना बजरंगी को दिल्ली और यूपी पुलिस की सयुंक्त टीम ने समयबादली थाना क्षेत्र में 11 सितंबर 1998 को एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। मुन्ना बजरंगी की मौत की खबर भी प्रसारित हो गई पर अस्पताल पहुंचा तो उसकी सांसें चल रही थी।

जुर्म की दुनिया में पहला कदम

Munna bajrangi shooter firing in varanasi by AK 47
मुन्ना बजरंगी - फोटो : SELF
यूपी के जौनपुर में जन्मे  प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा। वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया।

 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। उसके मुंह खून लग चुका था. इसके बाद उसने  जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया। उसके बाद उसने कई लोगों की जान ली। 

दावा है कि मुन्ना बजरंगी ने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 से ज्यादा हत्यायएं की है। 
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