फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Mukhtar Ansari death News of Wife Afsha not see mukhtar dead body

मुख्तार का ऐसा था रुतबा: जेल में भी साथ रह लेती थी पत्नी आफ्शा, अब पति के शव का दीदार भी नसीब नहीं

Sat, 30 Mar 2024 12:00 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 30 Mar 2024 12:00 AM IST
सार

Mukhtar Ansari Death: मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसका शव शुक्रवार की देर रात बांदा से गाजीपुर पहुंचा। इस दौरान आवास के बाहर भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। मुख्तार की पत्नी आफ्शा लंबे समय से फरार है। ऐसे में उसे पति के शव का दीदार भी करने का मौका नहीं मिल सका। 

विज्ञापन
Mukhtar Ansari death News of Wife Afsha not see mukhtar dead body
Mukhtar Ansari And Afsha Ansari - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विज्ञापन

मुख्तार अंसारी का खौफ और वर्चस्व किसी जमाने में इतना था कि उसकी पत्नी आफ्शा अंसारी जेल में न सिर्फ रोज मिलने जाती थी, बल्कि कई बार पति के साथ जेल की सलाखों के पीछे भी रह लेती थी। लेकिन, समय का चक्र ऐसा बदला कि आफ्शा अपने पति की मौत के बाद शव का आखिरी दीदार तक नहीं कर पा रही है।

मुख्तार की दोस्ती महरुपुर निवासी अतिउर रहमान उर्फ बाबू से थी। घर से पांच किमी दूर अतिउर रहमान के घर मुख्तार का आना जाना होता था। इसी समय मुख्तार की अतिउर रहमान की भतीजी आफ्शा अंसारी से दोस्ती हो गई। बाद में दोनों ने लव मैरिज शादी कर ली। मुख्तार अंसारी जरायम की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया और आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
विज्ञापन


आफ्शा भी पति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने लगी। 2005 में मुख्तार के जेल जाने के बाद अफ्शा ने उसके धंधे को टेकओवर कर लिया। बच्चों के बड़े होने के बाद मुख्तार के गैंग आईएस-191 की कमान उसने अपने हाथों में ले ली। स्थिति यह हो गई कि उसके खिलाफ गंभीर आरोपों में कुल 13 मुकदमे दर्ज हो गए। गाजीपुर पुलिस ने 50 और मऊ पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। आफ्शा की धरपकड़ के लिए जनपद से लेकर राजधानी तक की पुलिस लगी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

वाहनों के नंबर माफिया के काफिले की थे पहचान

मुख्तार के काफिले के वाहनों के नंबर से ही माफिया के काफिले की पहचान हो जाती थी। लोगों का हुजूम दर्द सुनाने के लिए वहां पहुंच जाता था। उनके दर्द को सुन और मरहम लगाकर मुख्तार गरीबों का मसीहा बन गया था। लोगों ने बताया कि मुख्तार के काफिले में शामिल लग्जरी वाहनों का एक ही नंबर था 786, जिससे देखते ही काफिले की पहचान हो जाती थी। त्योहार पर ईदगाह से नमाज पढ़कर निकलता था तब उससे हाथ मिलाने और फोटो खिंचवाने वालों युवाओं की लंबी कतार लग जाती थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed