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मां ने दूसरों के बर्तन धोकर बेटे को बनाया नेशनल खिलाड़ी
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वाराणसी। 18 साल पहले पति के छोड़कर जाने के बाद छित्तूपुर की रहने वाली किरन देवी ने अपने दो बच्चों की जिम्मेदारी संभाली। दूसरों के घर बर्तन साफ करके बेटे को नेशनल हैंडबाल खिलाड़ी और 16 वर्षीय बेटी डाली सरोज को 12वीं में पढ़ा रही है।
किरन ने बताया कि 26 साल पहले उनकी शादी जौनपुर के मड़ियाहूं में हुई थी। कुछ साल ससुराल में रहने के बाद पति हुबराज सरोज घर छोड़ कर चले गए। इसके बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी किरन के कंधों पर आ गई। पांचवीं तक पढ़ी किरन ससुराल छोड़कर अपने मायके आ गईं और अपनी मां के साथ रहने लगी। मगर यहां उन्हें दो बच्चों के परवरिश की चिंता हुई तो किरन न चाहते हुए भी घर से बाहर निकली और लोगों के घर सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक खाना बनाना, सब्जियां लाना और बर्तन धोने का काम शुरू किया।
किरन ने मेहनत करके अपने दोनों बच्चों को न सिर्फ पढ़ाया-लिखाया बल्कि बेटे शुभम सरोज को नेशनल खिलाड़ी भी बनाया। वहीं बेटी डॉली 39 जीटीसी में 12वीं की पढ़ाई कर रही है। अब किरन को सुकून है कि उनका बेटा एक कामयाब खिलाड़ी है। सब कुछ ठीक रहा तो वह अपने काबिलियत की बदौलत और आगे बढ़ता जाएगा।
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किरन ने बताया कि 26 साल पहले उनकी शादी जौनपुर के मड़ियाहूं में हुई थी। कुछ साल ससुराल में रहने के बाद पति हुबराज सरोज घर छोड़ कर चले गए। इसके बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी किरन के कंधों पर आ गई। पांचवीं तक पढ़ी किरन ससुराल छोड़कर अपने मायके आ गईं और अपनी मां के साथ रहने लगी। मगर यहां उन्हें दो बच्चों के परवरिश की चिंता हुई तो किरन न चाहते हुए भी घर से बाहर निकली और लोगों के घर सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक खाना बनाना, सब्जियां लाना और बर्तन धोने का काम शुरू किया।
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किरन ने मेहनत करके अपने दोनों बच्चों को न सिर्फ पढ़ाया-लिखाया बल्कि बेटे शुभम सरोज को नेशनल खिलाड़ी भी बनाया। वहीं बेटी डॉली 39 जीटीसी में 12वीं की पढ़ाई कर रही है। अब किरन को सुकून है कि उनका बेटा एक कामयाब खिलाड़ी है। सब कुछ ठीक रहा तो वह अपने काबिलियत की बदौलत और आगे बढ़ता जाएगा।
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