सामूहिक दुष्कर्म केस: आईआईटी बीएचयू की कहानी पर सवाल, सुनवाई में निर्भया कांड का भी जिक्र आया; मिली अगली तारीख
आईआईटी बीएचयू मामले में फास्टट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े तथ्यों और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। सुनवाई में निर्भया कांड का भी जिक्र आया। आनंद चौहान की ओर से बहस शुरू की गई। मामले में अगली सुनवाई 16 अक्तूबर को निर्धारित की गई है। कोर्ट में आगे की बहस के दौरान मामले के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी।
विस्तार
आईआईटी बीएचयू की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बृहस्पतिवार को फास्टट्रैक कोर्ट (प्रथम) के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। आरोपी आनंद चौहान की ओर से अधिवक्ता ने बहस शुरू करते हुए अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 16 अक्तूबर की तारीख नियत की है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना वाली रात चेतगंज में नक्कटैया के कारण शहर में काफी भीड़ थी। आरोपियों का दावा है कि वे बीएचयू की ओर से घर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पीड़िता और उसके कथित साथी को आपत्तिजनक स्थिति में देखा। बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने भारतीय संस्कृति को ध्यान में रख केवल गार्ड को इसकी सूचना दी और घर जाकर सो गए।
फास्टट्रैक कोर्ट में चल रही सुनवाई
अधिवक्ता ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि अभियोजन का कथानक झूठ पर आधारित है। बचाव पक्ष ने पुलिस की विवेचना पर भी सवाल उठाए। दलील दी गई कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पीड़िता और उसके कथित साथी के मोबाइल फोन का विवरण नहीं लिया गया, जबकि आरोपियों के मोबाइल की जांच की गई। बचाव पक्ष ने शिनाख्त प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोपों को निराधार बताया। बहस के दौरान दिल्ली के निर्भया कांड का भी कई बार जिक्र किया गया।
ये है मामला : अभियोजन के अनुसार, दो नवंबर 2023 की रात बीएचयू परिसर में मोटरसाइकिल सवार तीन आरोपियों ने आईआईटी की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने लंका थाने में तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के दौरान सुंदरपुर स्थित बृज एन्क्लेव कॉलोनी निवासी कुणाल पांडेय, बजरडीहा के जीवधिपुर निवासी आनंद उर्फ अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल के नाम सामने आने पर उन्हें आरोपी बनाया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मनोज गुप्ता तथा बचाव पक्ष के अधिवक्ता मौजूद रहे।