मिर्जापुर के घंटाघर की घड़ी है बेमिसाल, लंदन से बनकर आई घड़ी बिगड़ी तो अब बनाने वाले नहीं मिले
मिर्जापुर में समय बताने वाली तीन सौ किलो के घंटा व 20 फीट लंबे पेंडुलम वाली घड़ी अपने अपमान से गूंगी हो गई है। यकीन नहीं होता पर यह सोलह आना सच है। नगर के मध्य जनता के चंदे से मात्र अठारह हजार रूपये में सवा सौ साल पहले बने भारत के बेजोड़ घंटाघर की तरह गुरुत्वाकर्षण बल से चलने वाली उसकी घड़ी भी बेमिसाल है।
घंटाघर की मीनार पर गुरुत्वाकर्षण बल से चलने वाली लंदन की घड़ी भी घंटाघर की तरह ही बेजोड़ है। मीनार की चारों दीवार पर लगी घड़ी को तत्कालीन सदस्य ने दान किया था। सवा सौ तक साल नगर को जगाने व समय बताने वाली घड़ी रख रखाव के अभाव में कबाड़ बन कर रह गयी है। विशाल घंटे वाली इस घड़ी की आवाज 20 किलोमीटर की चतुर्दिक परिधि में सुनाई देती थी।
उस समय घर-घर में घड़ी नहीं थी। तब सरकारी कर्मचारी एवं व्यापारी इस घड़ी की गूंजने वाली आवाज को सुनकर समय जानते थे और कामकाज शुरू करते थे। सवा सौ वर्ष से अधिक समय तक लोगो को जगाने व समय बताने वाली घंटाघर की घड़िया अब बंद पड़ी है। 1866 में लंदन के मेसर्स मियर्स स्टेंन बैंक कंपनी की बनाई घड़ी आज गूंगी हो गई है।
धरोहर बन चुके इमारत ओर उसकी घड़ी के के प्रति प्रशासनिक उदासीनता से लोग खिन्न हैं। पूर्वजों ने दान करके अंग्रेजों के शासन काल में इसे बनवाया पर नई पीढ़ी आजाद होने के बाद भी अपनी धरोहरों के प्रति उदासीन बनी है।
मिर्जापुर नगर पालिका के उपाध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया कि इस घड़ी को कई बार बनवाया गया। कई बार यह ठीक भी हुई लेकिन अब इसके कारीगर नहीं मिल रहे हैं। इससे यह बंद है। प्रयास किया जा रहा है कि इसके कारीगर की व्यवस्था की जाए ताकि यह घड़ी अपनी पूर्व अवस्था को फिर से प्राप्त हो।