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असलहों का अच्छा जानकार था मेराज, मुन्ना बजरंगी को मुहैया कराई थी एके-47, अनिल सिंह हत्याकांड में भी नाम जुड़ा
Sat, 15 May 2021 09:35 AM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sat, 15 May 2021 09:35 AM IST
सार
मुख्तार अंसारी के करीबी मेराज का नाम आपराधिक मामलों में शामिल था। इसकी शुक्रवार को चित्रकूट जेल में गैंगवार में हत्या कर दी गई थी। साथ में मुकीम काला की भी हत्या हुई थी। पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी से भी अच्छे संबंध थे। दोनों ने साथ में कई वारदातों को अंजाम दिया था।
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मुन्ना बजरंगी, मेराज।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की सरपरस्ती में भी मेराज ने कई कारनामे किए थे। पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे कारनामें दर्ज भी हैं। पूर्वांचल में पहली बार एके-47 मुन्ना बजरंगी को मुहैया कराने में मेराज का ही नाम सामने आया था। 19 दिसंबर 2002 को वाराणसी के मलदहिया चौराहे पर एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर भाजपा नेता अनिल सिंह समेत चार की हत्या कर दी गई थी।
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अनिल सिंह हत्याकांड में पहली बार मेराज का नाम मुन्ना बजरंगी के साथ जुड़ा था। सिगरा थाने में दर्ज मेराज के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास मुकदमे के दौरान विवेचना में यह भी सामने आया था कि मुन्ना बजरंगी को असलहा मेराज ने ही मुहैया कराया था।
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असलहों का शौकीन मेराज के ऊपर दर्ज डेढ़ दर्जन मुकदमों में अधिकतर मुकदमें अवैध असलहा रखने के ही हैं। असलहों के बारे में मेराज को बहुत अच्छी जानकारी थी। मेराज को करीब से जानने वाले बताते थे कि मेराज कहीं भी जाता था तो अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर चलता था। पिस्टल की चाहत में ही दूसरे पते पर लाइसेंस नवीनीकरण कराया और यही से मेराज के ऊपर कार्रवाई की तलवार लटकी तो फिर लटकती ही चली गई।
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जरायम जगत से जुड़े लोगों को शरण देना, वसूली और मछली कारोबार से मेराज ने ठीक-ठाक साम्राज्य स्थापित कर लिया था। बसपा शासनकाल में मेराज की नजदीकियां कई मंत्रियों से भी रहीं। उस दौरान मेराज ने काफी धन अर्जित किया था। वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, मऊ सहित अन्य जनपदों में मेराज की दखल रहती थी।