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अन्नपूर्णा के दरबार में खजाने पाने के लिए भी उमड़े श्रद्धालु, जयकारों के साथ किए मां के दर्शन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 06 Nov 2018 12:37 AM IST
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मां अन्नपूर्णा दरबार
- फोटो : amar ujala
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वर्ष में एक बार होने वाले अन्नपूर्णा मां के स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन पूजन के लिए लाखों श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचे। मां के दर्शन पूजन के बाद उनका खजाना पाने के लिए रविवार की रात्रि में आठ बजे से ही लोगों की कतार लग गई थी। जो आठ घंटे बाद भोर में चार बजे मां का दर्शन पूजन कर खजाना पा सके। इसके लिए करीब चार किमी लंबी कतार लगी हुई थी।
विश्वनाथ मंदिर के रेड जोन में स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के स्वर्णमयी प्रतिमा साल में एक बार धनतेरस पर चार दिनों के लिए खुलती है। इस प्रतिमा के दर्शन पूजन के लिए न केवल काशी वासी बल्कि देश के कोने कोने से लोग पहुंचते हैं।
इस दौरान मां के खजाना भी भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इस आशीर्वाद पाने के लिए भक्त रात में ही लंबी कतारों में लग गए थे। सोमवार की भोर में सर्वप्रथम मंदिर के पंडित सत्यनारायण पांडेय और उनके सुपुत्र ने माता का पूजन प्रारम्भ किया मंदिर के महंत रामेश्वर पूरी महाराज ने भव्य आरती की।
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मंदिर महंत ने बताया कि स्वयं बाबा भोलेनाथ भिक्षा मांगने आए थे, उसी समय ही मां ने वरदान दिया था की कोई भी काशी नगरी में भूखा नहीं सोयेगा। तब से यह परंपरा चली आ रही है। इस दर्शन के लिए एक कतार गोदौलिया से ढेढ़सी के पुल तक जा पहुंचा था, दूसरी कतार चौक थाने के समीप थी।
जैसे जैसे समय नजदीक आ रहा था भक्तों ने कहा कि बाबा बाबा सब कहे माई कहे न कोई, बाबा के दरबार में माई कहे सो होय का जयकारा लगाना शुरू हो गया। वहां बोलो सच्चे दरबार की जय के नारे गूंजते रहे। इस दौरान दर्शन करने राज्य मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी रहे।
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विश्वनाथ मंदिर के रेड जोन में स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के स्वर्णमयी प्रतिमा साल में एक बार धनतेरस पर चार दिनों के लिए खुलती है। इस प्रतिमा के दर्शन पूजन के लिए न केवल काशी वासी बल्कि देश के कोने कोने से लोग पहुंचते हैं।
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इस दौरान मां के खजाना भी भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इस आशीर्वाद पाने के लिए भक्त रात में ही लंबी कतारों में लग गए थे। सोमवार की भोर में सर्वप्रथम मंदिर के पंडित सत्यनारायण पांडेय और उनके सुपुत्र ने माता का पूजन प्रारम्भ किया मंदिर के महंत रामेश्वर पूरी महाराज ने भव्य आरती की।
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मंदिर महंत ने बताया कि स्वयं बाबा भोलेनाथ भिक्षा मांगने आए थे, उसी समय ही मां ने वरदान दिया था की कोई भी काशी नगरी में भूखा नहीं सोयेगा। तब से यह परंपरा चली आ रही है। इस दर्शन के लिए एक कतार गोदौलिया से ढेढ़सी के पुल तक जा पहुंचा था, दूसरी कतार चौक थाने के समीप थी।
जैसे जैसे समय नजदीक आ रहा था भक्तों ने कहा कि बाबा बाबा सब कहे माई कहे न कोई, बाबा के दरबार में माई कहे सो होय का जयकारा लगाना शुरू हो गया। वहां बोलो सच्चे दरबार की जय के नारे गूंजते रहे। इस दौरान दर्शन करने राज्य मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी रहे।
कैमरों से हो रही थी निगाहबानी
उमड़े भक्त
- फोटो : amar ujala
इस दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के दर्शन पूजन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई थी। वहीं मंदिर कंट्रोल रूम भी बनाया गया था। इससे हर ओर नजर रखी जा रही थी। इसके अलावा सादे ड्रेस में भी पुलिस और खुफिया के लोग परेशान थे। मंदिर में अस्थाई तौर पर एक डॉक्टर टीम मौजूद थी डॉक्टर ने लगभग दूर दराज से आये लगभग सैकड़ों भक्तों का उपचार किया।
उधर, शीतला घाट स्थित बड़ी शीतला धाम के भूगर्भ में सिथत मां अन्नपूर्णा देवी के दर्शन के लिए भक्त पहुंचे। जहां खजाना बांटा गया। मंदिर में गुफा के भीतर स्थित इस मंदिर में मां अन्नपूर्णा, भगवान शंकर के अलावा कई देवताओं के स्वर्ण और धातु की प्रतिमा है, जहां दर्शन पूजन के लिए शाम को भेक्त पहुंचे।
चार बजे आरती पूजन करने के लिए बाद भक्तों के दर्शन के लिए पट खोल दिया गया। महंत शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि इस प्रतिमा का दर्शन धनतेरस के दिन करना शुभ माना जाता है।
उधर, शीतला घाट स्थित बड़ी शीतला धाम के भूगर्भ में सिथत मां अन्नपूर्णा देवी के दर्शन के लिए भक्त पहुंचे। जहां खजाना बांटा गया। मंदिर में गुफा के भीतर स्थित इस मंदिर में मां अन्नपूर्णा, भगवान शंकर के अलावा कई देवताओं के स्वर्ण और धातु की प्रतिमा है, जहां दर्शन पूजन के लिए शाम को भेक्त पहुंचे।
चार बजे आरती पूजन करने के लिए बाद भक्तों के दर्शन के लिए पट खोल दिया गया। महंत शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि इस प्रतिमा का दर्शन धनतेरस के दिन करना शुभ माना जाता है।