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Varanasi News: 108 महिलाओं ने निकाली कलशयात्रा, बही श्रीरामकथा की गंगा; नौ दिवसीय कथा का शुभारंभ
Fri, 07 Jun 2024 01:25 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Fri, 07 Jun 2024 01:25 PM IST
सार
Varanasi News: यात्रा जैतपुरा, नागकुआं, डिगिया प्लाॅट, राजापुरा, गोपालबाग कॉलोनी होते हुए पुनः मंदिर पहुंची, जहां पर कलश पूजन के बाद स्थापना हुई। शाम को कथा का शुभारंभ काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय, जगदीश दास महाराज, अवध किशोर दास महाराज, मंदिर के महंत वागेश्वरी मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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अखिल भारतीय सनातन न्यास की ओर से जैतपुरा से कलश यात्रा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अखिल भारतीय सनातन न्यास की ओर से गुरुवार को जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी मंदिर से गाजेबाजे के साथ कलश शोभायात्रा निकाली गई। इसके साथ ही मंदिर परिसर में नौ दिवसीय नवाह्न पारायण एवं श्रीरामकथा का शुभारंभ हुआ।
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पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालकदास महाराज के नेतृत्व में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मंदिर में पूजन-अर्चन के बाद जयकारे लगाते हुए शोभायात्रा निकाली। 108 महिलाओं ने सिर पर जलपूरित कलश लिया था। पुरुष धर्म ध्वज लिए और गले में रामनामी दुपट्टा धारण किए चल रहे थे।
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आगे यजमान डॉ. अजय जायसवाल सिर पर पोथी लिए चल रहे थे। कथा व्यास बालकदास महाराज ने पहले दिन शिव विवाह की महिमा गान किया। कहा कि कलियुग में जहां श्रीरामकथा होती है, वहां शिव जी की चर्चा अवश्य करनी चाहिए। कथा 14 जून तक प्रतिदिन शाम सात से रात 10 बजे तक चलेगी। शोभायात्रा में डॉ. पुष्पा जायसवाल, रविशंकर सिंह, रवि जायसवाल, जयशंकर गुप्ता, ज्ञानचंद मौर्य, डॉ. गीता चौबे, राजेश सेठ आदि शामिल रहे।
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विंध्यवासिनी षष्ठी पर मां का मनेगा प्राकट्योत्सव
मघा नक्षत्र हर्षण योग में 12 जून को मां विंध्यवासिनी जंयती मनाई जाएगी। देवी मंदिरों में विशेष पूजन अर्चन होगा। पूजन से मां की कृपा बरसेगी। मां के तीन रूपों मां आदिशक्ति महालक्ष्मी विंध्यवासिनी, अष्टभुजी अर्थात महासरस्वती और महाकाली के रूप में विराजमान हैं। मिर्जापुर में विध्यांचल धाम के अलावा काशी में काशीपुरा में मां विंध्यवासिनी मंदिर है।
ज्येष्ठ मास शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि पर मां विंध्यवासिनी मनाई जाएगी। इसे स्कंद षष्ठी भी कहते हैं। इस मां के प्राकट्योत्सव का पर्व मनाया जाता है। ज्योतिष विमल जैन व आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने ने बताया कि शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर मां के प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। इस दिन भक्त सुबह स्नानादि करके मां विन्ध्यवासिनी की पूजा करते हैं।
घरों में मां की प्रतिमा रखकर उन्हें जल, पुष्प, अक्षत, रोली और भोग अर्पित कर विधिवत पूजन करते हैं। घी का दीपक जलाए जाते हैं और आरती कर हवन पूजन करते हैं। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण ने बताया कि भगवती विंध्यवासिनी आद्या महाशक्ति हैं। विंध्याचल उनका निवास स्थान है। विंध्यगिरि को जाग्रत देवीपीठ है। महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर देवी की स्तुति की थी। श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में इसकी कथा आती है।