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विश्वनाथ मंदिर में बनेगी फूस की तीन मंजिला यज्ञशाला
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 16 Jan 2017 05:54 PM IST
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यज्ञशाला के लिए न्यास अध्यक्ष और सीईओ ने किया भूमि पूजन
- फोटो : amarujala
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काशी विश्वनाथ मंदिर में यज्ञशाला के लिए भूमि पूजन किया गया। मंदिर परिसर के आग्नेय कोण में फूस, कास और गन्ने की पत्तियों से तीन मंजिला यज्ञशाला बनेगी।
इसके बाद श्रद्धालु बाबा के दरबार में अतिरुद्र और लघुरुद्र, महारुद्र यज्ञ कर सकेंगे।
इसके लिए मंदिर प्रशासन जल्द ही शुल्क निर्धारण करेगा। न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी के साथ दोपहर बाद यज्ञशाला के लिए भूमि पूजन किया।
सविधि मंत्रोच्चार के साथ पूजा हुई। इस यज्ञशाला में 16 देवताओं के नाम पर खंभे बनाए जाएंगे।
चारों वेदों के नाम पर चारों दिशाओं में यज्ञ मंडप के द्वार होंगे। यज्ञशाला की डिजाइन भी तैयार की गई है।
इससे पहले 27 लाख रुपये की लागत से यज्ञशाला का निर्माण होना था लेकिन न्यास ने इसे स्थगित कर दिया।
अब उसी जगह पर फूस की अस्थाई यज्ञशाला बनाई जाएगी। तीन मंजिला यज्ञशाला के निर्माण में बांस, कास और गन्ने की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके निर्माण के लिए कोलकाता के कारीगरों से संपर्क साधा गया है।
न्यास अध्यक्ष ने बताया कि इस यज्ञशाला में कोई भी श्रद्धालु निर्धारित शुक्ल देकर यज्ञ करा सकेगा। पहली बार विश्वनाथ मंदिर परिसर में 1982 में यज्ञ हुआ था।
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इसके बाद श्रद्धालु बाबा के दरबार में अतिरुद्र और लघुरुद्र, महारुद्र यज्ञ कर सकेंगे।
इसके लिए मंदिर प्रशासन जल्द ही शुल्क निर्धारण करेगा। न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी के साथ दोपहर बाद यज्ञशाला के लिए भूमि पूजन किया।
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सविधि मंत्रोच्चार के साथ पूजा हुई। इस यज्ञशाला में 16 देवताओं के नाम पर खंभे बनाए जाएंगे।
चारों वेदों के नाम पर चारों दिशाओं में यज्ञ मंडप के द्वार होंगे। यज्ञशाला की डिजाइन भी तैयार की गई है।
इससे पहले 27 लाख रुपये की लागत से यज्ञशाला का निर्माण होना था लेकिन न्यास ने इसे स्थगित कर दिया।
अब उसी जगह पर फूस की अस्थाई यज्ञशाला बनाई जाएगी। तीन मंजिला यज्ञशाला के निर्माण में बांस, कास और गन्ने की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके निर्माण के लिए कोलकाता के कारीगरों से संपर्क साधा गया है।
न्यास अध्यक्ष ने बताया कि इस यज्ञशाला में कोई भी श्रद्धालु निर्धारित शुक्ल देकर यज्ञ करा सकेगा। पहली बार विश्वनाथ मंदिर परिसर में 1982 में यज्ञ हुआ था।
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