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Varanasi News: बीएचयू में लिक्विड बायोप्सी, डिजिटल पीसीआर जांच से कैंसर मरीजों को राहत
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बीएचयू अस्पताल में कैंसर मरीजों को लिक्विड बायोप्सी, डिजिटल पीसीआर जांच की सुविधा से इलाज में बड़ी राहत होगी। मंगलवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने आईएमएस में डायमंड्स केंद्र में उन्नत लिक्विड बायोप्सी कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने केंद्र में मिलने वाली जांच की सेवाओं की सराहना की।
बीएचयू के डीएचआर-आईसीएमआर एडवांस्ड मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी डायग्नोस्टिक सर्विसेज (डायमंड्स) केंद्र में राष्ट्रीय व्यावहारिक कार्यशाला में डिकोडिंग कैंसर थ्रू लिक्विड बायोप्सी: फ्रॉम सीएफ-डीएनए/सीएफ-आरएनए एक्सट्रैक्शन टू डीडीपीसीआर डेटा इंटरप्रिटेशन का उद्घाटन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न जगहों से आए ऑन्कोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट को ड्रॉपलेट डिजिटल पीसीआर प्लेटफॉर्म और सर्कुलेटिंग बायोमार्कर विश्लेषण की जानकारी दी गई। कुलपति ने कहा कि प्रयोगशाला के अत्याधुनिक अनुसंधानों को सीधे मरीजों के उपचार से जोड़ने में डायमंड्स केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। बीएचयू अस्पताल में लिक्विड बायोप्सी और डिजिटल पीसीआर जैसी अत्याधुनिक मॉलिक्यूलर जांच तकनीकों की उपलब्धता से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के कैंसर मरीजों को जीवनरक्षक जेनेटिक एवं मॉलिक्यूलर जांचें किफायती व सुलभ दर पर प्राप्त होंगी।
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने कहा कि डायमंड्स केंद्र के तहत उच्च स्तरीय डायग्नोस्टिक सुविधाओं के संचालन से पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और नेपाल तक के मरीजों के लिए उन्नत जांचों की भारी कमी दूर हुई है। चिकित्सा संकाय के प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने इस पहल के शैक्षणिक महत्व के बारे में बताया। आईएमएस बीएचयू के डीन रिसर्च प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि डायमंड्स केंद्र ने हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से करीब सात करोड़ के दो प्रमुख वाह्य शोध अनुदान हासिल किए हैं। इसमें पित्ताशय (गॉलब्लैडर) कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए लिक्विड बायोप्सी जीन सिग्नेचर पर आधारित लगभग 2.65 करोड़ का आईसीएमआर-एनआईआरएफ प्रोजेक्ट मिला है जबकि ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (टीएनबीसी) में इम्यूनोथेरेपी रिस्पॉन्स के सटीक आकलन के लिए एआई आधारित प्लेटफॉर्म विकसित करने संबंधी लगभग 4.23 करोड़ का आईसीएमआर इंटरमीडिएट प्रोजेक्ट शामिल हैं।
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बीएचयू के डीएचआर-आईसीएमआर एडवांस्ड मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी डायग्नोस्टिक सर्विसेज (डायमंड्स) केंद्र में राष्ट्रीय व्यावहारिक कार्यशाला में डिकोडिंग कैंसर थ्रू लिक्विड बायोप्सी: फ्रॉम सीएफ-डीएनए/सीएफ-आरएनए एक्सट्रैक्शन टू डीडीपीसीआर डेटा इंटरप्रिटेशन का उद्घाटन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न जगहों से आए ऑन्कोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट को ड्रॉपलेट डिजिटल पीसीआर प्लेटफॉर्म और सर्कुलेटिंग बायोमार्कर विश्लेषण की जानकारी दी गई। कुलपति ने कहा कि प्रयोगशाला के अत्याधुनिक अनुसंधानों को सीधे मरीजों के उपचार से जोड़ने में डायमंड्स केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। बीएचयू अस्पताल में लिक्विड बायोप्सी और डिजिटल पीसीआर जैसी अत्याधुनिक मॉलिक्यूलर जांच तकनीकों की उपलब्धता से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के कैंसर मरीजों को जीवनरक्षक जेनेटिक एवं मॉलिक्यूलर जांचें किफायती व सुलभ दर पर प्राप्त होंगी।
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आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने कहा कि डायमंड्स केंद्र के तहत उच्च स्तरीय डायग्नोस्टिक सुविधाओं के संचालन से पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और नेपाल तक के मरीजों के लिए उन्नत जांचों की भारी कमी दूर हुई है। चिकित्सा संकाय के प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने इस पहल के शैक्षणिक महत्व के बारे में बताया। आईएमएस बीएचयू के डीन रिसर्च प्रो. मनोज पांडेय का कहना है कि डायमंड्स केंद्र ने हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से करीब सात करोड़ के दो प्रमुख वाह्य शोध अनुदान हासिल किए हैं। इसमें पित्ताशय (गॉलब्लैडर) कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए लिक्विड बायोप्सी जीन सिग्नेचर पर आधारित लगभग 2.65 करोड़ का आईसीएमआर-एनआईआरएफ प्रोजेक्ट मिला है जबकि ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (टीएनबीसी) में इम्यूनोथेरेपी रिस्पॉन्स के सटीक आकलन के लिए एआई आधारित प्लेटफॉर्म विकसित करने संबंधी लगभग 4.23 करोड़ का आईसीएमआर इंटरमीडिएट प्रोजेक्ट शामिल हैं।
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