काशी विश्वनाथ धाम: भक्तों के लिए सुलभ बनाने की तैयारी, जुड़ेगा पैदल पुल से, तीन जेटी से यात्री करेंगे नौकायन
पूर्वांचल और पूर्वी भारत से काशी आने वाले पर्यटकों को विकल्प के लिए प्रस्तावित रामनगर से पड़ाव तक बनने वाली करीब आठ किलोमीटर लंबी सड़क का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर लिया गया है।
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नव्य, भव्य और दिव्य काशी विश्वनाथ धाम की राह भक्तों के लिए सुलभ बनाने के लिए ऋषिकेश में बने लक्ष्मण झूला की तर्ज पर पैदल पुल बनाया जाएगा। डोमरी से ललिता घाट के बीच बनने वाला यह पुल रिवर फ्रंट योजना का हिस्सा होगा और इसके साथ ही रामनगर से पड़ाव के बीच बनने वाली सड़क से तीन अलग अलग सर्विस रोड गंगा तट बनने वाली जेटी से जुड़ेंगी।
इस जेटी से नौका संचालन कराया जाएगा और वह दूसरे जिलों से आने वाले पर्यटक व श्रद्धालुओं को शहर की कनेक्टविटी मजबूत करेगा।पूर्वांचल और पूर्वी भारत से काशी आने वाले पर्यटकों को विकल्प के लिए प्रस्तावित रामनगर से पड़ाव तक बनने वाली करीब आठ किलोमीटर लंबी सड़क का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर लिया गया है।
लक्ष्मण झूला की तर्ज पर डोमरी से ललिता घाट के बीच बनेगा पुल
इसमें सड़क के साथ ही डोमरी से ललिता घाट के बीच पैडस्ट्रियन ब्रिज बनाने का प्रस्ताव है। यह पुल ऋषिकेश में बने लक्ष्मण झूला की तर्ज पर लोहे के मजबूत जाल से बनेगा और भक्तों को सीधा काशी विश्वनाथ धाम से जोड़ेगा।
इसके लिए डोमरी में करीब दो हजार वाहनों की पार्किंग भी बनाई जाएगी। ऐसे ही तीनों जेटी को जोड़ने वाली सर्विस लेन के दोनों किनारों पर भी वाहनों की पार्किंग की सुविधा होगी। यहां पूर्वांचल के अलग अलग जिलों से वाराणसी आने वाले लोग रामनगर व पड़ाव से गुजरने वाली सड़क के माध्यम से गंगा तट तक पहुंचेंगे और वहां से नाव से शहर की ओर बिना जाम में फंसे पहुंच सकेंगे।
यहां बता दें कि 21 सौ करोड़ रुपये की रिवर फ्रंट योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और इस परियोजना को अप्रैल तक धरातल पर उतारने की तैयारी हो रही है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि डोमरी से ललिता घाट के बीच पैदल पुल और तीन जेटी निर्माण का प्रस्ताव रिवर फ्रंट योजना में शामिल किया गया है।
भीड़ जुटने वाले इस केंद्रों पर पार्किंग की सुविधा होगी। फिलहाल परियोजना की निविदा जारी करने के लिए नियम और शर्तों पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही इसका टेंडर जारी कर दिया जाएगा।
एनओसी से पहले टेंडर पर भी विचार
शहर को जाम मुक्त करने के लिए प्रस्तावित इस परियेाजना को शुरू करने से पहले केंद्र के तीन मंत्रालयों से अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। इसमें वन मंत्रालय, नमामि गंगे और पर्यावरण मंत्रालय से पत्राचार शुरू किया गया है। विकास प्राधिकरण को इस परियोजना के लिए नोडल एजेंसी बनाया जाएगा और उसके माध्यम से टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने पर भी विचार हो रहा है।अधिकारियों का तर्क है कि कार्यदायी संस्था तय होने के बाद एनओसी के लिए उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।