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UP: अगले दो महीने में काशी बनेगी देश की पहली गार्बेज फ्री सिटी, मेयर ने पेश किया विकास का रोडमैप; जानें खास

Wed, 27 May 2026 11:29 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 27 May 2026 11:29 AM IST
सार

Nagar Nigam Varanasi: वाराणसी के मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि अगले दो महीने में काशी को गार्बेज फ्री सिटी बनाया जाएगा। 27 में से 23 कूड़ाघर बंद हो चुके हैं। करसड़ा में 12.60 लाख टन कचरा बायोमाइनिंग से हटाया जाएगा। भेलूपुर में 104 करोड़ रुपये से शिव थीम पर इंटरप्रिटेशन सेंटर पार्क भी बनेगा।

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Kashi Set to Become India First Garbage-Free City Next Two Months Mayor Unveils Development Roadmap
पत्रकारों को विकास के रोडमैप की जानकारी देते मेयर व अन्य अधिकारी। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: मेयर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि अगले दो महीने में काशी गार्बेज फ्री सिटी होगी।  नगर निगम इस दिशा में तेजी से कदम आगे बढ़ा रहा है। अब तक 27 में से 23 कूड़ाघर बंद किए जा चुके हैं। बाकी बचे चार कूड़ा घरों को भी समाप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। 

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मंगलवार को स्मार्ट सिटी कार्यालय के सभागार में अपने तीन साल के कार्यकाल के पूरे होने पर मेयर अशोक कुमार तिवारी ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने बीते तीन वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं। साथ ही अगले दो साल के कार्यकाल के विकास का रोडमैप भी पेश किया। 
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मेयर ने कहा कि भेलूपुर जलकल परिसर में शहर का सबसे बड़ा पार्क विकसित किया जाएगा। 25 एकड़ में काशी इंटरप्रिटेशन सेंटर पार्क विकसित करने का लक्ष्य है। ये पार्क शिव की थीम पर होगा। इसमें 130 फीट ऊंचा शिवलिंग होगा। पार्क में ही फूड प्लाजा और संग्रहालय का भी निर्माण होगा। इस पर 104 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 
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मेयर ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में 41वें स्थान पर रहने वाला अपना शहर 2025 में 17वें स्थान पर पहुंच गया। सफाईकार्मियों की संख्या 4075 से बढ़ाकर 7428 कर दी गई। प्रमुख मंदिरों व मार्गों पर तीन शिफ्ट में सफाई हो रही है। निगम का बजट 843 करोड़ से 2775.44 करोड़ हो गया है।

बायोमाइनिंग तकनीक से करसड़ा में खत्म होगा 12.60 लाख टन कूड़े का पहाड़
करसड़ा में दस साल से डंप 12.60 लाख टन कूड़े के पहाड़ को बायोमाइनिंग तकनीक से डेढ़ साल में खत्म किया जाएगा। यहां पर मियावाकी तकनीक से एक वन विकसित किया जाएगा। कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया नगर निगम ने मंगलवार को शुरू कर दी है। मेयर अशोक कुमार तिवारी ने इसका शुभारंभ किया। 

मेयर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अप्रैल को इस परियोजना का सूत्रपात किया गया था, जिसे आज धरातल पर उतारा जा रहा है। अगले डेढ़ वर्ष में यह स्थान कूड़े के ढेर के बजाय एक सघन वन के रूप में नजर आएगा। नगर निगम ने इस कचरे को वैज्ञानिक तरीके से खत्म करने का जिम्मा उठाया है। इसके लिए 53.15 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। 

बायोमाइनिंग प्रक्रिया के माध्यम से कूड़े को छांटकर उसका उचित निस्तारण किया जाएगा। कूड़े के पहाड़ को पूरी तरह से साफ करने के बाद खाली होने वाली 25 एकड़ भूमि पर मियावाकी तकनीक से सघन जंगल विकसित करने की योजना है। इससे न केवल शहर का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा, बल्कि यह क्षेत्र एक पर्यावरण-अनुकूल हरित पट्टी के रूप में उभरेगा।

इस अवसर पर राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या आदि मौजूद रहे। उधर, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि इको स्टैन इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से बायोमाइनिंग तकनीक से कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए विशेष क्लीमैन मशीन का उपयोग किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी ड्रोन के माध्यम से की जाएगी। इस प्रक्रिया से निगम को कार्बन क्रेडिट के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की भी संभावना है। 

विजन 2028

  • भेलूपुर में भव्य ‘शिवा थीम पार्क’, फूड प्लाजा और संग्रहालय का निर्माण।
  • अस्सी घाट, मैदागिन, भदैनी और सारनाथ में पार्किंग।
  • शहर में पांच नए स्पोर्ट्स सेंटर, महिलाओं के लिए वर्किंग वूमेन हॉस्टल और 40 कुंडों/तालाबों का जीर्णोद्धार।
  • 1000 कुओं की सफाई और 150 पार्कों का सुंदरीकरण।
  • शहर के चारों कोनों पर मीट-मांस की बिक्री के लिए कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया जाएगा। 
  • नमो बनारस केंद्र : बुनकरों और व्यापारियों के लिए 145.36 करोड़ की लागत से माल गोदाम रोड के पास आधुनिक नमो बनारस केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। इसमें बनारसी साड़ी के लिए 348 दुकानें होंगी। 

ये है बायोमाइनिंग तकनीक 
इंदाैर और भोपाल की तर्ज पर कूड़े का पहाड़ बायोमाइनिंग तकनीक से खत्म होगा। यह सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया और कवक) की मदद से पुराने कचरे को संसाधित करने की एक पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है। इसके जरिये कचरे को अलग कर उपयोगी संसाधनों में बदला जाता है। कचरे को प्राकृतिक रूप से सड़ने दिया जाता है। भारी मशीनें और खतरनाक रसायन की तुलना में यह काफी सस्ती और प्रदूषण-मुक्त विधि है।

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