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बीएचयू में पाट दिया सौ साल पुराना तालाब
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 26 Apr 2016 02:29 AM IST
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जेसीबी से पाटा जा रहा तालाब।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय जहां एक ओर अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष को सेलिब्रेट कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय में सौ साल पुराने तालाब को पाटकर उसपर बहुमंजिला इमारत खड़ा करने की तैयारी चल रही है। यह हाल तब है जब विश्वविद्यालय जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए तमाम अभियानों, अनुसंधानों और और शोधों पर पानी की तरह पैसा बहा रहा है। विश्वविद्यालय की नहीं देश की अदालतें भी प्राकृतिक जलस्त्रोंतों, कुडों, तालाबों और पोखरों के संरक्षण को लेकर गंभीर हैं। ऐसे में सौ साल पुराने एक पोखरे को पाटने की खबर से हड़कंप मच गया है।
जल संकट के मंडराते खतरे से निबटने के लिए जहां केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से तरह-तरह के जतन किए जा रहे हैं। तमाम योजनाएं चलाने के साथ ही कुंडों और तालाबों को बचाने के लिए जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है। वहीं, आईआईटी बीएचयू में स्थित 100 साल पुराने तालाब का अस्तित्व मिटने की कगार पर है। तीन एकड़ में फैले इस तालाब को एक महीने से जेसीबी की मदद से मिट्टी से पाटा रहा है। इसे पाटने के बाद यहां आईआईटी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने की तैयारी में है। मगर हैरत की बात यह है कि इस पूरे मामले से बीएचयू प्रशासन बेखबर है।
वैसे तो बीएचयू और आईआईटी दोनों ही समय-समय पर जल संरक्षण, भूजल दोहन पर कार्यशालाएं आयोजित कर युवा पीढ़ी को प्रकृति से प्रेम का संदेश देते हैं। मगर ज्ञान की उसी धरा पर सौ साल पुराने जलस्त्रोत के अस्तित्व पर संकट तमाम सवाल खड़ा कर रहा है। बताया जाता है कि कृषि फार्म हाउस के पास स्थित यह तालाब विश्वविद्यालय के स्थापना काल से ही मौजूद है। जब विश्वविद्यालय के लिए यह जमीन ली गई थी, तभी से यह तालाब मौजूद है। बारिश में तालाब में पानी भर जाता था। यह तालाब भूजल संरक्षण में भी मददगार रहा है। सूत्र बताते हैं कि बीते एक महीने से इस तालाब में मिट्टी भरी जा रही है। तालाब का एक बड़ा हिस्सा पाटा जा चुका है। सोमवार को भी जेसीबी लगाकर पोखरे को समतल करने का काम जारी था।
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जल संकट के मंडराते खतरे से निबटने के लिए जहां केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से तरह-तरह के जतन किए जा रहे हैं। तमाम योजनाएं चलाने के साथ ही कुंडों और तालाबों को बचाने के लिए जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है। वहीं, आईआईटी बीएचयू में स्थित 100 साल पुराने तालाब का अस्तित्व मिटने की कगार पर है। तीन एकड़ में फैले इस तालाब को एक महीने से जेसीबी की मदद से मिट्टी से पाटा रहा है। इसे पाटने के बाद यहां आईआईटी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने की तैयारी में है। मगर हैरत की बात यह है कि इस पूरे मामले से बीएचयू प्रशासन बेखबर है।
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वैसे तो बीएचयू और आईआईटी दोनों ही समय-समय पर जल संरक्षण, भूजल दोहन पर कार्यशालाएं आयोजित कर युवा पीढ़ी को प्रकृति से प्रेम का संदेश देते हैं। मगर ज्ञान की उसी धरा पर सौ साल पुराने जलस्त्रोत के अस्तित्व पर संकट तमाम सवाल खड़ा कर रहा है। बताया जाता है कि कृषि फार्म हाउस के पास स्थित यह तालाब विश्वविद्यालय के स्थापना काल से ही मौजूद है। जब विश्वविद्यालय के लिए यह जमीन ली गई थी, तभी से यह तालाब मौजूद है। बारिश में तालाब में पानी भर जाता था। यह तालाब भूजल संरक्षण में भी मददगार रहा है। सूत्र बताते हैं कि बीते एक महीने से इस तालाब में मिट्टी भरी जा रही है। तालाब का एक बड़ा हिस्सा पाटा जा चुका है। सोमवार को भी जेसीबी लगाकर पोखरे को समतल करने का काम जारी था।
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