देश के दुश्मन भारत की मजबूत सैन्य शक्ति के आगे बौनेः आर्मी चीफ बिपिन रावत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश के दुश्मन भारत की मजबूत सैन्य शक्ति के आगे बौने नजर आ रहे हैं। पड़ोसी देशों से बातचीत के जरिए सीमा समस्या का समाधान राजनीतिक लोगों का काम है, लेकिन सीमा की रक्षा के लिए सेना अपना काम करती है।
पाक के थल सेनाध्यक्ष द्वारा सीमा विवाद में गोली से नहीं, बोली से हल निकालने के सवाल पर कहा कि बातचीत करना सरकार और राजनेताओं का काम है। लेकिन सेना देश की रक्षा में कोई कोताही बरतने को तैयार नहीं है।
चीन और पाकिस्तान में कौन बड़ा दुश्मन है? इस सवाल पर थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि जब जवान देश की सीमा पर तैनात होता है, तो हमारे देश से बड़ा कोई नहीं होता, ऐसे मे हमारे देश को नुकसान पहुंचाने वाला ही हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है।
जम्मू कश्मीर में पत्थरबाज और आतंकवाद के स्थाई हल के सवाल पर उन्होंने कहा कि परिस्थितियां काफी बदली हैं और और अब पहले से काफी कुछ कंट्रोल में है।
जवानों के भोजन में मिलावट और छुट्टी को लेकर असंतोष पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक समस्या का सामाधान घर में है। किसी भी पीड़ित को अपनी समस्या अपने उच्चाधिकारियों से कहना चाहिए। उसका समाधान निश्चित होगा।
डोकलाम मुद्दे पर आर्मी चीफ ने ये कहा
पत्रकार वार्ता से पहले धामूपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम में सेनाध्यक्ष ने शहीद की पत्नी रसूलन बीबी को सम्मानित किया। वो उनके अन्य परिवारों से मिल कर हालचाल लिया।
परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस के मौके गाजीपुर जिले धामूपुर पहुंचे सेनाध्यक्ष विपिन रावत ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच से उन्होंने शहीद अब्दुल हमीद के शौर्य का वर्णन किया। साथ ही उपस्थित लोगों की मांग पर जिले में भर्ती का आश्वासन भी दिया।
पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने डोकलाम मुद्दे पर बोला की दोनों ही पक्षों को सुलह के बिन्दूओं पर कायम रहना चाहिए। कश्मीर में शांति सुरक्षा के सवाल पर कहा कि वहाँ शांति व्यवस्था के लिए सेना और पुलिस के जवान पूरी कोशिश में लगे हैं।
इस दौरान भारतीय सेना से जुड़े तमाम अधिकारी और जवान भी मौजूद रहे। गाजीपुर के धामूपुर गांव के वीर अब्दुल हमीद ने वर्ष 1965 के भारत पाक युद्ध मे अपनी वीरता और साहस का प्रदर्शन करते हुए दुश्मनों की सेना के कई टैंको के परखच्चे उड़ा दिए थे, इसी दौरान शहीद होने वाले अब्दुल हमीद को मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया।
वीर अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि पर आज गाजीपुर में उनके पैतृक गांव में बड़ी संख्या में लोगों ने देश के इस सपूत को सम्मान के साथ अपनी भानभीनी श्रद्धाजंली अर्पित की।
राज्यपाल बोले, इस धरती पर आना मेरा सौभाग्य
परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की 52वें शहादत दिवस पर महामहिम राज्यपाल रामनाईक भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि मैं आज खुद को भाग्यवान समझता हूं कि वीर अब्दुल हमीद की जन्मभूमि पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यहां के वीरों ने देश के लिए शहादत दिया है। मैं उनको भी प्रणाम करता हूं। राज्यपाल ने कहा कि पाकिस्तान ने धोखा दिया है, तो सेना ने उसी तरह से जवाब दिया है।
1965 में जो लड़ाई हुई थी उस समय टैंक तोड़ने वाले कभी- कभी वीर पैदा होते हैं ऐसे वीर को प्रणाम करता हूं। परमवीर चक्र अब तक केवल 21 लोगों को मिला है। जिसमें एक वीर शहीद अब्दुल हमीद हैं। पाकिस्तान के साथ लड़ाई में 450 सैनिक शहीद हुए थे।
सैनिकों के परिजनों को पर्याप्त पेंशन नहीं मिलती है। जब मैं पेट्रोलियम मंत्री था, तब शहीदों के परिजनों को गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप दिया था। कहा कि देश का सैनिक शरहद पर 24 घंटे ही नहीं, सात दिन नहीं, बल्कि 12 महीने जागृत रहकर निगेहबानी करते हैं। तभी हम अपने घरों में शांति से सोते हैं।
इस अहसान को हम पूरा नहीं कर सकते। शहीद के त्याग को याद करने के लिए शहादत दिवस मनाते हैं। कहा कि अब्दुल हमीद का पौत्र जमील बड़ा होशियार है। मुझे बुलाया और कहा हमारी इच्छा है, कोई डिमांड नहीं है। जबकि अपनी ओर से उन्होंने चार इच्छा व्यक्त की है, उसके लिए मैं प्रयास करूंगा। शहीद की रसूलन बीबी ने राज्यपाल को चार मांगों से संबंधित मांग पत्र सौंपा।