जीएसटी में ई-वे बिल का नया प्रावधान उद्योग व व्यापार जगत के लिए बना परेशानी का सबब: आईआईए
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वाराणसी में जीएसटी में ई-वे बिल सहित अन्य व्यवहारिक दिक्कतों ने व्यापारियों व उद्यमियों को संकट में डाल दिया है। ई-वे बिल का नया नियम उद्योग व व्यापार जगत के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उद्यमियों ने बैठक कर कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद इसके प्राविधानों में इतने अधिक परिवर्तन हो गए हैं, जिससे इसके जानकर भी हैरान हैं। इसका पूरी तरह सरलीकरण किया जाए, जिससे आम कारोबारी परेशान न हो।
आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि ई-वे बिल के नए नियम के मुताबिक किसी भी सामान को 24 घंटे में 200 किलोमीटर तक पहुंचाना है। पहले ये 24 घंटे में 100 किलोमीटर था लेकिन अब यह आसान नहीं है क्योंकि आएदिन रास्तों पर लगने वाले जाम से घंटे भर से अधिक समय की बर्बाद होने के साथ-साथ इस तरह की कई व्यावहारिक कारण है।
जिससे मौजूदा समय में गाड़ी को 24 घंटे में 200 किमी पहुंचाने में दिक्कत आ रही है, जैसे कि रास्ते में गाड़ी खराब हो जाना, धरना-प्रदर्शन में गाड़ी फंस जाना, ड्राइवर या हेल्पर का रास्ते में गांव पड़ जाने से घर पर रुक जाना या ड्राइवर का रास्ते में बीमार हो जाना और ऐसे में यदि ई-वे बिल में अंकित तय समय में माल आपूर्तित नहीं हो पाया तो माल को गैर कानूनी मानकर दोगुना टैक्स व जुर्माना वसूला जा रहा है।
वहीं ई-वे बिल के नए नियम के तहत विभाग के पोर्टल पर समय बढ़ाने की सुविधा है लेकिन सही समय पर मालवाहक के देरी होने की जानकारी वाहन चालक की अज्ञानता या अन्य वजहों से व्यापारी को नहीं हो पाती है। जिसका खामियाजा उसे उठाना पड़ रहा है। उसकी ऊर्जा उत्पादन की जगह इन झंझटों से छुटकारा पाने में ही लग जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत नियमों का सरलीकरण करने, सुगम व्यापार के लिए उद्योग व व्यापार में आने वाली अड़चनों को दूर करने व पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने की दिशा में सरकार कारगर कदम उठा रही है। वही दूसरी ओर जीएसटी में ई वे बिल सहित अनेक अव्यवहारिक प्राविधानों ने उद्योग व्यापार जगत को संकट में डाल दिया है यह प्राविधान उद्योग व्यापार जगत के परेशानी का सबब बन रहा है, जो कि इंस्पेक्टर राज के साथ-साथ भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा देगा।